Home जयपुर ब्याज अनुदान और ऋण माफी के 1525 करोड़ अटके, सहकार नेता आमेरा ने CMO को लिखा पत्र

ब्याज अनुदान और ऋण माफी के 1525 करोड़ अटके, सहकार नेता आमेरा ने CMO को लिखा पत्र

सार 

Jaipur : सहकार नेता आमेरा ने अतिरिक्त मुख्य सचिव CMO और वित्त विभाग प्रमुख शासन सचिव को लिखा पत्र : ब्याज अनुदान और ऋण माफी के 1525 करोड़ अटके और 904 करोड़ PD खाते में फंसे

विस्तार 

राजस्थान | 17 मार्च | डिजिटल डेस्क | प्रदेश में सहकारी आंदोलन के त्रि-स्तरीय ढांचे के पैक्स और सीसीबी में व्याप्त गहरे आर्थिक संकट और वित्तीय तरलता की कमी को लेकर कद्दावर सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा ने एक बार फिर आवाज़ बुलंद की है । उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव CMO और वित्त विभाग प्रमुख शासन सचिव को एक विस्तृत और बेहद गंभीर पत्र लिखकर प्रदेश के केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) और पैक्स/लैम्पस(PACS/LAMPS) की जर्जर होती हालत से अवगत कराया है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत बकाया 1525.67 करोड़ रुपये की राशि 31 मार्च 2026 से पूर्व जारी नहीं की, तो प्रदेश का पूरा सहकारी ढांचा ढह सकता है और करीब 35 लाख किसानों के लिए साख व्यवस्था का संकट खड़ा हो जाएगा । सहकार नेता आमेरा ने अपनी इस परिवेदना में रेखांकित किया कि ‘सहकारिता से समृद्धि’ के जिस संकल्प को राज्य में साकार करने का सपना देखा जा रहा है, वह जमीनी हकीकत में बकाया अनुदान और ब्याज राशि के कारण दम तोड़ रहा है । उनके अनुसार, राज्य सरकार की वर्ष 2018-19 की ऋण माफी योजना और ब्याज अनुदान मदों में भारी भरकम राशि लंबित होने के कारण केंद्रीय सहकारी बैंक (CCBs) अब शुद्ध हानि और संचित हानि की स्थिति में आ गए हैं, जिससे रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े वित्तीय मानदंडों के तहत इन DCCBs के बैंकिंग लाइसेंस पर भी तलवार लटक गई है । सहकार नेता ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया है कि राज्य सरकार ने किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसली ऋण देने की घोषणा तो कर दी, लेकिन इसके बदले बैंकों को मिलने वाला 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान और बैंकों द्वारा स्वयं के कोष से वहन की जाने वाली 0.80 प्रतिशत क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है ।

CRAR गिरने से पुनर्वित्त ठप

सहकार नेता ने कहा कि, स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि कई पैक्स कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन तक नहीं मिल पा रहा है, जिससे पूरे प्रदेश के सहकारी बैंक कर्मियों में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है । नाबार्ड द्वारा फसली पुनर्वित्त सुविधा में की गई भारी कटौती और सरकारी खातों का निजी बैंकों में स्थानांतरण होने से सहकारी बैंकों के पास नकदी का भारी अभाव हो गया है । सहकार नेता ने चेतावनी दी है कि अधिकांश बैंकों का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) वांछित 9 प्रतिशत से नीचे गिर गया है, जिससे उन्हें नाबार्ड से पुनर्भरण मिलना बंद हो गया है । उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग की है कि ऋण माफी का बकाया 8 प्रतिशत ब्याज और अन्य सभी लंबित क्लेम का तत्काल भुगतान कर सहकारी साख चक्र को निर्बाध बनाए रखा जाए ।

लंबित है 1500 करोड़ से अधिक का भुगतान

सहकार नेता आमेरा ने बताया कि 12 मार्च 2026 तक राज्य सरकार पर कुल 1525.67 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है, इसमें ऋण माफी पर 8 प्रतिशत ब्याज के तहत कुल 1391.08 करोड़ रुपये के क्लेम प्राप्त हुए थे, जिनमें से सरकार ने 624.44 करोड़ का भुगतान किया है, जबकि 766.64 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। इसमें से 483.29 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत होना अभी बाकी है । जबकि 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान पेटे वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक की अवधि के लिए कुल 1097.22 करोड़ के क्लेम में से 528.60 करोड़ का भुगतान हुआ है। अभी भी 568.62 करोड़ रुपये लंबित हैं, जिसमें से 127.06 करोड़ की स्वीकृति लंबित है । साथ ही, 0.80 प्रतिशत क्षतिपूर्ति ब्याज अनुदान में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए कुल 783.16 करोड़ के क्लेम में से 602.98 करोड़ का भुगतान किया गया, जबकि 180.18 करोड़ रुपये अभी भी DCCBs को मिलने शेष हैं । इसी तरह, दीर्घकालीन कृषि एवं अकृषि ऋण अनुदान मद में 5.83 करोड़ के दावों के विरुद्ध मात्र 1.81 करोड़ का भुगतान हुआ है, जिससे 4.02 करोड़ रुपये बकाया चल रहे हैं ।

904 करोड़ PD खाते में होने के बावजूद अटके 

सहकार नेता के मुताबिक, ग्रामीण परिवार आजीविका ऋण योजना अनुदान पेटे कुल 12.72 करोड़ के क्लेम में से 7.05 करोड़ का भुगतान हुआ है और 5.67 करोड़ रुपये की राशि लंबित है । इसी तरह अल्पकालीन, मध्यकालीन और दीर्घकालीन ऋण माफी की मूल राशि में से 0.54 करोड़ रुपये अभी भी लंबित श्रेणी में हैं । कुल मिलाकर, DCCBs के कुल 18657.96 करोड़ के दावों में से 17132.29 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। वर्तमान में कुल लंबित राशि 1525.67 करोड़ रुपये है। ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि इसमें से 904.41 करोड़ रुपये पी.डी. खाते (PD Account) में स्थानांतरित तो कर दिए गए हैं, लेकिन तकनीकी प्रतिबंधों के कारण बैंक उनका आहरण नहीं कर पा रहे हैं, जबकि 695.82 करोड़ रुपये की तो अभी वित्तीय स्वीकृति तक जारी नहीं हुई है

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

error: Content is protected !!