Home | cooperative | राज्य | लोगों का एंपावरमेंट करने की जिम्मेदारी सोसायटी यानी सहकार और सरकार दोनों की है : शाह

लोगों का एंपावरमेंट करने की जिम्मेदारी सोसायटी यानी सहकार और सरकार दोनों की है : शाह

image0039OXU 300x200नई दिल्ली । 23 जून I केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय और NAFCUB द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग सहकारिता को एक अलग दृष्टि से देखते हैं और इसे दक़ियानूसी, कालबाह्य और अप्रासंगिक मानते हैं। मगर मैं इन सबसे यह कहना चाहता हूँ कि आज आप अमूल, कृभको, इफ्को और लिज्जत पापड़ के मॉडल को देखिए। यह सहकारी संस्थाएं सौ साल से ज़्यादा पुरानी हैं, वही, 195 से अधिक कोऑपरेटिव बैंकों को देखिए तब आपको मालूम पड़ेगा कि ये आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। श्री शाह ने कहा कि सौ साल एक बहुत बड़ा कालखंड होता है और देश की सहकारिता ने बहुत ही सफलता के साथ इस यात्रा को पूरा किया है, परंतु अगले सौ साल तक सहकारिता का व्यापक और स्वीकृति बढ़ानी है और यह हम सबकी ज़िम्मेदारी है।
श्री अमित शाह ने कहा कि समाज के छोटे से छोटे तबके को केवल और केवल अर्बन स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लोन दे सकते हैं और उस तबके को ऊपर उठाने और विकास की प्रक्रिया में हिस्सेदार बनने का काम कोऑपरेटिव ही कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज सामान्य व्यक्तियों को रोजमर्रा की छोटी छोटी चीजों के लिए जब लोन चाहिए तो वह कॉपरेटिव बैंक की ओर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि लोगों का एंपावरमेंट करने की जिम्मेदारी सोसायटी यानी सहकार और सरकार दोनों की है। सशक्तिकरण के लिए अर्बन कोऑपरेटिव बैंक और अर्बन कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी से अच्छा जरिया और कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि 10,000 शाखाएं, 5 लाख करोड़ रुपये का डिपॉजिट, 3 लाख करोड रुपये का एडवांस यह देखने में बड़ा अच्छा लगता है लेकिन बैंकिंग क्षेत्र में हमारी हिस्सेदारी पर भी आत्मचिंतन करने की जरूरत है। बैंकिंग क्षेत्र में डिपॉजिट के मामले में अर्बन कॉपरेटिव बैंक की हिस्सेदारी केवल 3.25þ और एडवांस में 2.69þ है। हमें इससे संतुष्ट नहीं होना चाहिए बल्कि इसका विस्तार करने का संकल्प लेना चाहिए।

नए और प्रोफेशनल लोगों के लिए जगह बनाकर कोऑपरेटिव के क्षेत्र में लाना होगा

सहकारिता मंत्री ने कहा कि हमें नए और प्रोफेशनल लोगों के लिए जगह बनाकर उन्हें कोऑपरेटिव के क्षेत्र में लाना होगा। वे कोऑपरेटिव को आगे बढ़ाएंगे, जो नया आया है वह आपके अनुभव से सीखेगा और जो पुराना है वह नए को सिखाएगा, हमें यही अप्रोच अपनानी चाहिए। छ।थ्ब्न्ठ को क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के क्षेत्र पर भी ज्यादा थ्रस्ट देने की जरूरत है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि लगभग 1534 अर्बन कोऑपरेटिव बैंक, 10,000 से ज्यादा शाखाएं, 54 शेड्यूल बैंक, 35 मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक, 580 मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव, क्रेडिट सोसाइटीज और 22 राज्य संघ हैं। हर टाउन में एक अच्छी अर्बन कोऑपरेटिव बैंक होना समय और देश की जरूरत है। छ।थ्ब्न्ठ को कोऑपरेटिव बैंकों की समस्याओं को उठाना और उनका समाधान तो करना ही चाहिए परंतु साथ ही एक समान विकास के लिए भी और अच्छे ढंग से काम करना चाहिए। इसके लिए सफल बैंकों को भी समय निकाल कर आगे आना पड़ेगा।

सभी कोआपरेटिव का एक डेटा बैंक बना रही है केन्द्र सरकार

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार पूरी कोआपरेटिव का एक डेटा बैंक बना रहे हैं, भारत सरकार कोऑपरेटिव यूनिवर्सिटी की स्थापना का मार्ग प्रशस्त कर रही है और इस देश की कैबिनेट ने बड़ी सहकारी समितियों में जैम से खरीदने की मंजूरी भी दी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सरकारी संस्थाओं के अलावा अगर किसी को जैम से खरीदी की अनुमति देने का काम सिर्फ कोऑपरेटिव के लिए किया है, पारदर्शिता के लिए यह बहुत जरूरी है।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

error: Content is protected !!