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जिले की सहकारी समितियों में व्यवस्थापक पद पर नियुक्ति के मामले में जांच की मांग

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कॉन्सेप्ट फोटो ।

बाड़मेर । डिजिटल डेस्क । 4 जून । सीमावर्ती जिले की केन्द्रीय सहकारी बैंक के अधीन संचालित ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापक पद पर पदस्थापित कर्मियों की नियुक्ति को लेकर सहकारिता विभाग से धारा 55 में अविलंब जांच की मांग सहकारिता से जुड़े सुत्रो ने दोहराई है। प्रमुख सचिव सहकारिता विभाग को एक गोपनीय पत्र भेजते हुए सहकारिता से जुड़े सुत्रो ने बताया कि पिछले सालो में जिलेभर की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापक पद पर वित्तदाता बैंक द्वारा नियमों को घात बताकर अयोग्यताधारी व्यक्तियों को समितियों का चार्ज थमाया गया है । हालांकि राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 में नई धारा 29 (ख) के अनुसार राज्य की सहकारी सोसायटी के कर्मचारियों के चयन और भर्ती की शक्ति सहकारी भर्ती बोर्ड के पास निहित होने के बावजुद नवगठित ग्राम सेवा सहकारी समितियों में पूर्णकालीक व्यवस्थापको की नियुक्ति की गई हैं । समिति के संचालक मण्डल को इसका अधिकार नहीं होने के बावजुद अपने चहेतो को लाभ देने के लिए इनकी नियम विरुद नियुक्तियां की गई है।

यह है नियुक्ति की प्रक्रिया

सहकारी समितियों में नियुक्ति नियमों के अनुसार समिति में कोई व्यवस्थापक या सहायक व्यवस्थापक की नियुक्ति करनी है, तो समिति जिला मुख्यालय पर इसकी सूचना देगी और विभाग निर्धारित गाइड लाइन के अनुसार 21 से 33 वर्ष आयु और बीए तक शिक्षित अभ्यर्थी को समिति निर्धारित मापदण्डो के तहत नियुक्ति दे सकती थी । परन्तु 2017 के बाद से यह अधिकार सहकारी भर्ती बोर्ड के पास हैं ।

व्यवस्थापक चार्ज पर सवाल

ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापक पद पर नियुक्ति के मामले में वित्तदाता बैंक की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। सहकारिता से जुड़े सुत्रो ने जिले की कई सहकारी समितियों में व्यवस्थापक पद पर कार्यरत कर्मियों की नियुक्ति के मामले में सवाल उठाते हुए आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता, सेवा हस्तांतरण संबंधित नियमों की अवहेलना का पत्र में उल्लेख करते हुए नियम विरुद्व की गई नियुक्ति की अविलंब जांच करवाकर दोषी कर्मियों को पद से हटाये जाने की मांग की हैं ।

पीढी दर पीढी व्यवस्थापक पद पर नियुक्ति

जिले की कई ग्राम सेवा सहकारी समितियों में पुश्तैनी नियुक्तियों का कार-व्यवहार चल रहा है। कई सहकारी समितियों में तो सेवानिवृत व्यवस्थापक भी ठाट-बाट से कार्य कर रहें हैं । तो कई समितियों में पुत्र को समिति का मैनेजर बता कर स्वयं सरकार की अल्पकालीन फसली ऋण वितरण, वसुली करते हुए सेवानिवृत व्यवस्थापक स्वयं को “सर्वे-सर्वा” मान रहें हैं ।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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