
जयुपर । डिजिटल डेस्क I 7 अगस्त I प्रदेश में संचालित पैक्स-लेम्प्स (Pacs-lamps) में कार्यरत व्यवस्थापक-सहायक व्यवस्थापक की स्क्रीनिंग प्रक्रिया (Screening process) के माध्यम से नियमितिकरण करने के आदेश जारी कर अगले दिन ही कर्मचारियों की भर्ती, चयन प्रक्रिया एवं सेवानियम 2022 लागू का निर्णय किया है, लेकिन नये सेवानियम में पिछले वर्षो से पैक्स-लेम्प्स में स्थायी कार्यरत शिक्षित, योग्य, अनुभवी व कम्प्यूटर दक्ष (Educated, Qualified, Experienced and Computer Skilled) नोजवान सहायको को संविदा कर्मी बना दिया हैं । जिससे 5000 सहायक व्यवस्थापकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने की आंशका जताई जा रही है। वही, पूर्व समय में सहकारिता विभाग के पंजीयक द्वारा वर्ष 2010 में जारी आदेश के माध्यम से तय योग्यता के मापदंड के तहत पैक्स-लेम्प्स और मिनी बैंक में 5000 सहायक कर्मियों को रजिस्ट्रार, सहकारिता विभाग द्वारा जारी नये सेवानियमों में दरकिनार कर दिया है। जिससे सहायक व्यवस्थापक ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
स्वीकृत पद को संविदा करना सहकारिता विरोधी अनुचित निर्णय
सहकारी साख समितियां एम्पलाइज यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष सूरजभान सिंह आमेरा ने सोशल मिडिया में एक पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार से स्वीकृत समिति व मिनी बैंक सहायक व्यवस्थापक, मिनी बैंक केशियर, सेल्समेंन कर्मियों के स्वीकृत पदों को नये सेवा नियमों में संविदा का पद बनाने का विरोध करते हुए इसे सहकारी विभाग का सहकारिता विरोधी अनुचित निर्णय बताया है । जिसमें सरकार के प्रति भारी असंतोष है। जो आंदोलन का कारण बनेगा’’
यह है असल भावना
देश सहित प्रदेश में 1904 में सहकारिता आंदोलन की नींव रखी गई थी। सहकारी यानी साथ मिलकर कार्य करना। समान आर्थिक उद्देश्य के लिए साथ मिलकर काम करने वाले समिति बना सकते हैं। किसानों, ग्रामीण कारीगरों, भूमिहीन मजदूरों एवं जरुरत मंदों को अच्छा उत्पादक बनाना, किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाकर उपज का अच्छा दाम दिलाना उद्देश्य है।
इनका कहना है
सहकारी समिति (जीएसएस) में स्वीकृत सहायक व्यवस्थापक-सेल्समैन ही समिति के मुख्य कर्णधार है। जबकि मुख्य कार्यकारी व्यवस्थापक केवल नाममात्र का कार्य करते है, और व्यवस्थापक के पास पांच से छः समितियों का चार्ज होता है। लेकिन सहकारिता विभाग से जब भी स्क्रीनिंग का आदेश आता तो सिर्फ़ व्यवस्थापक का ही आता है, जबकि सहायक व्यवस्थापक एवं सैल्समेन का नियोक्ता निर्धारण या स्क्रीनिंग नहीं हो पा रही है । -जयकिशन विश्नोई, सहकार कर्मी, जालोर
एक्सपर्ट राय
जारी सेवानियम के तहत कार्यरत समिति सहायक व्यवस्थापक, मिनी बैंक सहायक व्यवस्थापक, सैल्समेन एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद डाईंग प्रकृति के होंगे। डाईंग केडर का अर्थ होता है कि जब कोई पद डाइंग कैडर में आता है तो वह उस पद पर कार्य कर रहे व्यक्ति के रिटायर होने के बाद स्वयं ही पद समाप्त हो जाता है। उस पद पर फिर किसी की भर्ती नहीं होती है। वही, सेवानियम के अनुसार समिति में व्यवस्थापक के अतिरिक्त पूर्व से कार्यरत जितने पूर्णकालिक कार्मिक हैं, जो डाईंग केडर के होंगे। स्वीकृत सहायक पदों के विरूद्ध उन्हें कार्यरत मानकर यदि शेष बचते हैं तो उन पदों पर सहायक संविदा पर नियुक्त किये जा सकेंगे। ऐसे में समझ सकते हैं कि सहकारी स्लोगन ‘एक सबके लिए, सब एक के लिए कहां’ सटीक बैठ रहा है।
उच्च न्यायालय के दरवाजे पहुंचे जंगम
सोशल मिडिया के माध्यम से आ रहीं खबर के अनुसार प्रदेश भर में कार्यरत पैक्स-लेम्प्स कर्मियों का संगठन के माध्यम से नेतृत्व करने वाले कुलदीप जंगम राजस्थान उच्च न्यायालय के दरवाजे पहुंच गये हैं । वही, सोशल मिडिया में जारी हुई खबर में आगामी कुछ ही दिनों में राजस्थान उच्च न्यायालय में सहकार कर्मियों की पीड़ा को अवगत करवाते हुए स्टे आर्डर लाने की पोस्ट वायरल हो रहीं है।


