सारांश
जालोर के सायला स्थित ओटवाला गांव में ‘सहकार से समृद्धि’ (Prosperity through Cooperation) विजन के तहत 2023 में नवगठित ग्राम सेवा सहकारी समिति (PACS) के लिए स्थानीय भामाशाह हुकम सिंह ने स्वेच्छा से 22 लाख रुपये की लागत से नवीन कार्यालय भवन एवं गोदाम बनवाया।
विस्तार 
जालोर। सहकारी जगत ग्राउंड रिपोर्ट 13अक्टूबर |जालोर जिले में सहकारी आंदोलन की सबसे छोटी लेकिन सबसे मजबूत इकाई ग्राम सेवा सहकारी समितियों (PACS ) के प्रति आमजन का अटूट समर्पण और सहकार की भावना सिर चढ़कर बोल रही है। जिले का सायला क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से कृषि बहुल होने के साथ-साथ सुकड़ी और जवाई जैसी जीवनदायिनी नदियों का प्रमुख बहाव और संगम क्षेत्र रहा है। इन नदियों के उपजाऊ आंचल ने इस पूरे अंचल को कृषि और पशुपालन का गढ़ बनाया है।इस समृद्ध कृषि बहुल अंचल में किसानों को सही समय पर खाद, बीज और भरोसेमंद वित्तीय ऋण (Financial Credit/Loan) सेवाएं मुहैया कराने में सहकारी समितियों की हमेशा से ऐतिहासिक और निर्णायक भूमिका रही है। इसी मजबूत सहकारिता की नींव को और आगे बढ़ाते हुए ‘सहकार से समृद्धि’ (Prosperity through Cooperation) विजन के तहत सायला पंचायत समिति के निकटवर्ती ओटवाला गांव में वर्ष 2023 में नवीन ग्राम सेवा सहकारी समिति का गठन किया गया था।नवीन समिति के गठन के बाद ओटवाला के ग्रामीणों और स्थानीय भामाशाहों ने सहकारिता के प्रति जो मिसाल पेश की है, वह आज पूरे जालोर जिले के सहकारी जगत में सकारात्मक पहल की चर्चा (Discussion) और मिसाल (Example/Benchmark) बनी हुई है। भूमि आवंटन के पश्चात गांव के भामाशाह हुकम सिंह दहिया ने सहकारिता की भावना से प्रेरित होकर अपने निजी कोष से करीब 20से 22लाख रुपये की लागत से ओटवाला समिति का नवीन गोदाम (Warehouse) और सर्व सुविधायुक्त कार्यालय भवन (Office Building) स्वेच्छा से बनाकर दिया।हाल ही में केंद्रीय सहकारी बैंक (Central Cooperative Bank) जालोर की आयोजित वार्षिक आमसभा (AGM) में बैंक के प्रबंध निदेशक (MD ) नारायण सिंह चारण ने इस अनुकरणीय योगदान की सराहना की। आमसभा के दौरान नवगठित समिति में भामाशाह को प्रोत्साहित कर गोदाम व भवन निर्माण कराने तथा कस्टम हायरिंग केंद्र ( Custom Hiring Centre) की सफल स्थापना के लिए ओटवाला समिति अध्यक्ष जबराराम एवं व्यवस्थापक हरतिगाराम देवासी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
दो दशकों की निस्वार्थ सेवा से जीता भरोसा, व्यवस्थापक देवासी की साख ने बदली तस्वीर
सहकारी आंदोलन की सफलता केवल कागजी योजनाओं पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह उस व्यवस्था को चलाने वाले निष्ठावान कर्मयोगियों के विश्वास पर टिकती है। जालोर जिले के सायला पैक्स (PACS) में पिछले दो दशकों से निरंतर सेवा दे रहे व्यवस्थापक हरतिगाराम देवासी ने अपनी कार्यकुशलता और किसानों के प्रति समर्पण से सहकारिता के प्रति एक मजबूत साख (Creditability/Reputation) कायम की है।सायला पैक्स के तहत लंबे समय तक ओटवाला क्षेत्र में दी गई उनकी अमूल्य और भरोसेमंद सेवाओं का ही परिणाम है कि आज इस क्षेत्र के किसानों का सहकारी व्यवस्था पर अटूट विश्वास है। जब वर्ष 2023 में ओटवाला में पृथक पैक्स का गठन हुआ, तो हरतिगाराम देवासी की सहकार आंदोलन के प्रति सदा तत्पर रहने की कार्यशैली ने ही ग्रामीणों को प्रेरित किया। इसी साख और भरोसे के चलते गांव के भामाशाह आगे आए और लाखों रुपये की लागत से समिति के लिए नवीन भवन व गोदाम का निर्माण संभव हो सका। देवासी का मानना है कि किसानों को समय पर ऋण व कृषि इनपुट (Agriculture Inputs) उपलब्ध कराना ही सहकारिता की सच्ची भावना है।
सुकड़ी-जवाई नदी के तटीय आंचल का ऐतिहासिक दौर और सहकारिता का उदय

जालोर जिले का सायला क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से पश्चिमी राजस्थान का समृद्ध कृषि बेल्ट (Agri Belt) माना जाता रहा है। इस क्षेत्र की उर्वरता का मुख्य आधार सुकड़ी और जवाई नदी का ऐतिहासिक बहाव क्षेत्र रहा है। पाली की पहाड़ियों से निकलने वाली जवाई और सिरोही-जालोर अंचल की सुकड़ी नदी के जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) ने सदियों से इस सायला अंचल की मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखा। प्राचीन काल से ही यहाँ का जनजीवन और पूरी अर्थव्यवस्था इन नदियों के मुहाने पर पनपी कृषि और पशुपालन पर निर्भर रही है।आजादी के बाद जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने के लिए सहकारी आंदोलन की शुरुआत हुई, तो इस कृषि बहुल क्षेत्र ने सहकारिता को हाथों-हाथ लिया। महाजनों के भारी ब्याज चक्र से किसानों को मुक्ति दिलाने में पैक्स (PACS) द्वारा दी जाने वाली भरोसेमंद और सुलभ वित्तीय ऋण सेवाओं ने क्रांतिकारी बदलाव लाया। सुकड़ी और जवाई के इस तटीय क्षेत्र के किसानों ने सहकारी समितियों को केवल ऋण लेने का जरिया नहीं, बल्कि अपनी सामूहिक प्रगति (Collective Growth) का माध्यम बनाया। यही ऐतिहासिक विरासत आज ओटवाला जैसे नवगठित पैक्स के प्रति जन-समर्पण के रूप में दिखाई दे रही है।


