Home | cooperative | राज्य | सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण की दिशा में बड़ा कदम: उर्वरक (Fertilizer) और बीज व्यापार के लिए एम-पैक्स (MPACS) को मिलेगी दृष्टिबंधक साख सीमा 

सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण की दिशा में बड़ा कदम: उर्वरक (Fertilizer) और बीज व्यापार के लिए एम-पैक्स (MPACS) को मिलेगी दृष्टिबंधक साख सीमा 

सार

राजस्थान सहकारी विभाग पंजीयक ने बहुद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋणदात्री समितियों (एम-पैक्स) को उर्वरक और बीज व्यापार हेतु दृष्टि बंधक और ताला कुंजी साख सीमा स्वीकृत करने के नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

विस्तार

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जयपुर: |प्रदेश डेस्क रिपोर्ट, 9 अक्टूबर |प्रदेश की बहुद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋणदात्री समितियों ( MPACS) के वित्तीय प्रबंध (Financial Management) को और अधिक सुचारू बनाने तथा किसानों को सुगमता से खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सहकारिता विभाग (Cooperative Department) ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कार्यालय रजिस्ट्रार सहकारी समितियाँ (Office of the Registrar, Cooperative Societies) द्वारा जारी नए आदेशों के तहत अब एम-पैक्स को उर्वरक, खाद, बीज और कीटनाशक (Pesticides) के व्यापार हेतु दृष्टिबंधक (Hypothecation) एवं ताला कुंजी (Pledge) साख सीमा स्वीकृत की जाएगी। इस व्यवस्था से ग्रामीण स्तर पर कृषि आदानों (Agricultural Inputs) की आपूर्ति को बल मिलेगा और किसानों को समय पर संसाधन प्राप्त हो सकेंगे।नई नीति के अंतर्गत साख सीमा (Credit Limit) के निर्धारण के लिए समितियों को कुछ अनिवार्य पात्रता मापदण्ड (Eligibility Criteria) पूरे करने होंगे, जिनमें समिति के पास पूर्णकालिक प्रशिक्षित व्यवस्थापक (Manager), स्वयं का अथवा किराए का कार्यालय व गोदाम (Godown) होना तथा प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केन्द्र के रूप में कार्य करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCBs) द्वारा हाइपोथिकेशन (Hypothecation) साख सीमा के मामलों में कुल स्टॉक मूल्य (Stock Value) का 60 प्रतिशत तथा प्लेज (Pledge) साख सीमा के मामलों में 75 प्रतिशत तक राशि स्वीकृत की जा सकेगी। समितियों को शेष 40 और 25 प्रतिशत राशि का मार्जिन अपने स्वयं के कोषों (Own Funds) से वहन करना होगा। रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा (Registrar Dr. Samit Sharma) द्वारा जारी इन दिशा-निर्देशों से सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता (Transparency) आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को नई गति मिलेगी।

शुद्ध प्रयोज्य वित्तीय साधनों और एनडीआर के आधार पर तय होगी ऋण क्षमता 

सहकारी समितियों को मिलने वाली साख सीमा (Credit Limit) में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए शुद्ध प्रयोज्य वित्तीय साधन की गणना को आधार बनाया गया है। आंतरिक संसाधनों (Internal Resources) और प्रतिबद्धताओं के अंतर से तय होने वाली इस एनडीआर (NDR) राशि के आधार पर समितियों को हाइपोथिकेशन (Hypothecation) सीमा डेढ़ गुना तथा प्लेज (Pledge) सीमा ढाई गुना तक मिल सकेगी। जिन समितियों का एनडीआर (NDR) शून्य या उससे कम है, उन्हें सामान्य रूप से नकद साख-सीमा (Cash Credit Limit) की अनुमति नहीं होगी तथा यह विशेष मामलों में उप या सहायक रजिस्ट्रार (Deputy/Assistant Registrar) की संस्तुति के पश्चात ही दी जा सकेंगी

गोदामों (Godowns) के भंडारण मानक और नियमित वित्तीय विवरण अनिवार्य

सुरक्षित भंडारण (Safe Storage) और नियमों की अनुपालना के वास्ते गोदामों के निर्माण और रख-रखाव के लिए भी कड़े नियम तय किए गए हैं। गोदाम (Godown) पूरी तरह पक्के, सीमेंटीकृत और नमी तथा चोरी से सुरक्षित होने चाहिए। इसके साथ ही, समितियों को प्रत्येक माह अपने प्राप्ति-भुगतान, संपत्ति-दायित्व और स्टॉक (Stock) के पाक्षिक विवरण पत्र अनिवार्य रूप से बैंक को प्रेषित करने होंगे। बिक्री (Sales) से प्राप्त एक लाख रुपये तक की राशि तुरंत बैंक में जमा करवाने का प्रावधान किया गया है, जिससे वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

 

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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