Home | cooperative | जोधपुर | फसली सहकारी ऋण वसुली अवधिपार (Overdue) होकर अटकी, माह में हर तीसरे दिन वीसी (VC) आयोजित करने वाले विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल..?

फसली सहकारी ऋण वसुली अवधिपार (Overdue) होकर अटकी, माह में हर तीसरे दिन वीसी (VC) आयोजित करने वाले विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल..?

सार

जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB) के अंतर्गत पैक्स समितियों में 36.14 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण अवधिपार (Overdue) हो गया है। अधिकारियों की उदासीनता और लचर कार्यशैली के कारण ग्रामीण स्तर पर PACS मे वित्तीय संकट गहराता जा रहा है।

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जोधपुर | सहकारी जगत की ग्राउंड रिपोर्ट – 4अक्टूबर |जिले के सहकारी त्रिस्तरीय ढांचागत जगत में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB) के अंतर्गत कार्यशील पैक्स (PACS) समितियों में बकाया अवधिपार ऋण (Overdue) का संकट अब विकराल रूप धारण करता जा रहा है। विभागीय स्तर के ताजा और चौंकाने वाले आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, जिले की विभिन्न पैक्स (PACS) सहकारी समितियों में कुल 5,116 किसानों पर लगभग 36.14 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फसली सहकारी ऋण राशि लंबे समय से अटकी हुई है। इस बेलगाम होती बकायेदारी ने सीसीबी (CCB) से लेकर पैक्स (PACS) की वित्तीय सेहत को हिलाकर रख दिया है।प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, चोरड़िया समिति में 1 करोड़ 96 लाख रुपये, देवातु में 2 करोड़ 8 लाख रुपये और रानेरी समिति में 1 करोड़ 45 लाख रुपये की भारी रकम अवधिपार (Overdue) चल रही है। इसके अलावा बरनाऊ, रामड़ावास, ढाढू, खांगटा, पीलावा, बावड़ी कलां और भीमासागर जैसी दर्जनों समितियों में भी बकाये का यह आंकड़ा करोड़ों तक पहुँच चुका है। एक दशक से अधिक समय से सीसीबी (CCB) में जमे प्रबंध निदेशक (Managing Director) और प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर तैनात अधिशाषी अधिकारियों (Executive Officers) व अतिरिक्त/सहायक अधिशाषी अधिकारियों की लचर कार्यशैली इस स्थिति की मुख्य वजह मानी जा रही है। एक समय था जब वरिष्ठ अधिकारी धनसिंह देवल ने जोधपुर सीसीबी (CCB) के अलावा कार्यक्षेत्र की पैक्स (PACS) को अवधिपार के कलंक से पूरी तरह मुक्त कर दिया था, लेकिन आज का यह अमला सीसीबी (CCB) के कोष पर केवल बोझ बनकर रह गया है। यदि समय रहते कठोर वसूली अभियान नहीं चलाया गया, तो सीसीबी (CCB) और पैक्स (PACS) स्तर का आगामी ऋण वितरण चक्र पूरी तरह ठप हो जाएगा।

पैक्स समितियों में ऋण वसूली ठप, कागजी कार्रवाई तक सिमटा निगरानी अमला

जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक के अधीन कार्यशील प्राथमिक सहकारी समितियों में ऋण वसूली की रफ्तार पूरी तरह हांफ चुकी है। बैंक और पैक्स (PACS) के बीच समन्वय के अभाव तथा फील्ड (Field) स्तर पर अधिकारियों की गहरी उदासीनता के कारण ओवरड्यू (Overdue) का ग्राफ लगातार आसमान छू रहा है। जानकारों का कहना है कि पैक्स (PACS) के निरीक्षण और पर्यवेक्षण के लिए तैनात किए गए प्रतिनियुक्त (Deputed) अधिकारी एसी कमरों और बैठकों तक सीमित हैं, जबकि धरातल पर वसूली के नाम पर शून्य परिणाम मिल रहे हैं। कागजी खानापूरी के इस खेल ने सहकार कर्मियों में भी भारी रोष पैदा कर दिया है। जानकारों का साफ मानना है कि जब तक प्रशासनिक अमले की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ग्रामीण स्तर की इन सहकारी समितियों की रीढ़ की हड्डी टूटती रहेगी और किसानों को भविष्य में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।

32 प्रमुख सोसायटियों पर 50 लाख से 2 करोड़ तक का बकाया, वित्तीय सेहत पर मंडराया संकट

केंद्रीय सहकारी बैंक के दायरे में आने वाली सोसायटियों में वित्तीय अनियमितता और लापरवाही का आलम यह है कि अकेले 32 प्रमुख पैक्स (PACS) एवं जीएसएस (GSS) ऐसे हैं, जिन पर 50 लाख से लेकर 2 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया चल रहा है। देवातु समिति पर सबसे अधिक 2 करोड़ 8 लाख रुपये का भारी-भरकम ओवरड्यू (Overdue) दर्ज किया गया है। इसके अलावा चोरड़िया, रानेरी, बरनाऊ, ढाढू, भीमासागर और नानेऊ जैसी दर्जनों समितियों में भी स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। मध्यम और छोटी समितियों में भी बकायेदारों की लंबी कतार ने सीसीबी (CCB) वसूली तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सहकारिता विभाग को सीसीबी (CCB) और पैक्स (PACS) में हर तीसरे दिन की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing / VC) की रस्म अदायगी छोड़कर अब राजनीतिक रसूख वाले अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा यह वित्तीय संकट पूरे सहकारी त्रिस्तरीय ढांचागत तंत्र को अंदर से खोखला कर देगा।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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