Home जोधपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने सिरोही की 57 सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर लगाई अंतरिम रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने सिरोही की 57 सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर लगाई अंतरिम रोक

सार 

Jodhpur : राजस्थान हाईकोर्ट ने सिरोही की 57 सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों के खिलाफ उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां सिरोही द्वारा प्रस्तावित दंडात्मक कार्रवाई और जांच परिणामों पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस कार्रवाई को एकतरफा माना।

जोधपुर । डिजिटल डेस्क | 22 मई | राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने सिरोही जिले की 57 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों के विरुद्ध उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां सिरोही द्वारा जारी जांच परिणामों को एकतरफा मानते हुए उनके खिलाफ प्रस्तावित धारा 57 व अनुशासनात्मक कार्रवाई के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है । दरअसल, सिरोही जिले की इन 57 ग्राम सेवा सहकारी समितियों द्वारा प्रोम जैविक खाद का क्रय किया जाना था, जिसकी जांच करने वाले सहकारिता विभाग के निरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि तत्कालीन समय में डीएपी खाद की भारी किल्लत होने के कारण व्यवस्थापकों ने किसानों की जरूरत को देखते हुए अपनी-अपनी समितियों के संचालक मंडल के वैध प्रस्ताव और कृषि विभाग से प्राप्त लाइसेंस के आधार पर ही यह खरीद की थी । निरीक्षक ने यह भी रेखांकित किया था कि विभाग द्वारा प्रोम खाद की न्यूनतम या अधिकतम दर निर्धारित करने के संबंध में कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई थी और समितियों ने मुनाफे को ध्यान में रखकर ही इसे बेचा जिससे कोई वित्तीय हानि नहीं हुई । इसके बावजूद उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां सिरोही ने निरीक्षक के निष्कर्षों के विपरीत जाकर और मनमाने तरीके से एक न्यूनतम व अधिकतम मानक दर का काल्पनिक गणितीय आधार तैयार करते हुए सभी व्यवस्थापकों, निरीक्षक तथा निजी कंपनियों को अनियमितता का दोषी ठहराकर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित कर दी थी । उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां सिरोही द्वारा कानून और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन कर जारी किए गए इस त्रुटिपूर्ण जांच परिणाम के विरुद्ध पीड़ित व्यवस्थापकों ने राजस्थान हाईकोर्ट की शरण ली । वहां याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अशोक कुमार चौधरी ने प्रभावी पैरवी करते हुए पुरजोर तर्क दिया कि यह खरीद पूरी तरह वैध और किसानों के हित में थी, जिससे सहमत होते हुए जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम स्टे जारी कर दिया ।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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