Home जयपुर सत्ता के गलियारों तक पहुँची कैडर अथॉरिटी गठन की गूँज : मंत्रियों और विधायकों की चौखट पर पहुंचें पैक्स कर्मचारी

सत्ता के गलियारों तक पहुँची कैडर अथॉरिटी गठन की गूँज : मंत्रियों और विधायकों की चौखट पर पहुंचें पैक्स कर्मचारी

सार 

Rajasthan : ग्राम सेवा सहकारी समितियों (Pacs) के कर्मचारी कैडर अथॉरिटी गठन और स्थायीकरण जैसी मांगों को लेकर 27 फरवरी से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर हैं। प्रदेशभर में पैक्स व्यवस्थापकों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में मंत्रियों, विधायकों और प्रमुख राजनेताओं को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा व्यक्त की ।

कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत को ज्ञापन सौंपते पैक्स कर्मचारी

विस्तार 

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 4 मार्च | प्रदेश में सहकारी आंदोलन के त्रि-स्तरीय ढांचे और कृषि ऋण व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली ग्राम सेवा सहकारी समितियां (जीएसएस) के कर्मचारी कठिन दौर से गुजर रहें हैं। यह कर्मचारी अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर 27 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर उतर आए हैं। दरअसल, राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, जयपुर के आह्वान पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब महज एक कर्मचारी आंदोलन न रहकर एक व्यापक रूप ले चुका है । मंगलवार को संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर में पैक्स व्यवस्थापकों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में मंत्रियों, विधायकों और प्रमुख राजनेताओं को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा व्यक्त की और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मार्च माह के अंत तक सरकार ने उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो समितियां अपनी स्वायत्तता की रक्षा के लिए अत्यंत कठोर कदम उठाने को विवश होंगी। इन कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदेश के राजनीतिक दिग्गजों को लामबंद करना शुरू कर दिया है। इनमें बानसूर विधायक देवीसिंह शेखावत को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्थापकों ने अपनी दयनीय स्थिति से अवगत कराया। वहीं आसींद में जितेन्द्रसिंह के नेतृत्व में विधायक जब्बर सिंह सांखला को मांग पत्र दिया गया। साथ ही, चूरू में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि वे इस विषय को सरकार के उच्चतम स्तर तक ले जाएंगे।

विधायक छगन सिंह राजपुरोहित को ज्ञापन सौंपते पैक्स कर्मचारी

सत्ता के गलियारों तक पहुँचाई आवाज

आहोर में संघर्ष समिति के संयोजक हनुमानसिंह राजावत ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए विधायक छगन सिंह राजपुरोहित को ज्ञापन दिया। पाली में सबसे सक्रिय रूप देखने को मिला, जहां व्यवस्थापक यूनियन ने कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत, कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत और बाली विधायक पुष्पेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपकर अपनी स्थिति से अवगत कराया। सोजत में पाली यूनियन अध्यक्ष शिवमंगलसिंह चौहान के नेतृत्व में विधायक श्रीमती शोभा चौहान को, लक्ष्मणगढ़ में देवेन्द्र कुमार सैदावत के नेतृत्व में विधायक मांगीलाल मीणा को, और शेरगढ़ में विधायक बाबुसिंह राठौड़ को ज्ञापन दिए गए। इसके अलावा धोद विधायक गोवर्धन वर्मा और विधायक रमेश खींची को भी मांग पत्र सौंपे गए। उपमुख्यमंत्री श्रीमती दिया कुमारी के पूर्व ओसीडी गोपाल सिंह शेखावत को भी इस गंभीर मामले की विस्तृत जानकारी दी गई है, ताकि सरकार के नीतिगत गलियारों में कर्मचारियों की आवाज गूंज सके।

कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत को ज्ञापन सौंपते पैक्स कर्मचारी

कैडर अथॉरिटी का हों तत्काल गठन

संघर्ष समिति की प्रमुख मांगों में कैडर अथॉरिटी का तत्काल गठन है। कर्मचारियों का तर्क है कि विभाग द्वारा बार-बार आश्वासन देने के बावजूद अब तक कोई अधिसूचना-आदेश जारी नहीं किए गए हैं, जिससे उनकी सेवा शर्तों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही, 10 जुलाई 2017 से पूर्व नियुक्त किए गए कर्मियों के स्थाईकरण के लिए एक विशेष नीति या पुनः स्क्रीनिंग करने की मांग की जा रही है। केंद्रीय सहकारी बैंकों में ऋण पर्यवेक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती के समय अनुभवी व्यवस्थापकों के लिए पद आरक्षित रखने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। वित्तीय मोर्चे पर, समितियों की साख सीमा के अनुसार पर्याप्त ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराने और वर्तमान महंगाई को देखते हुए 2 प्रतिशत के अत्यंत कम ब्याज मार्जिन को बढ़ाने की मांग की गई है। साथ ही, कृषि आदानों पर मिलने वाले अनुदान का सीधा वितरण समितियों के माध्यम से करने और वर्ष 1991 से 2005 के बीच घोषित नवीन पैक्स और लैम्पस को जिस तरह 20 लाख रुपये की सहायता प्रति समिति दी जाती थी, उसी तरह वर्तमान में 2000 से ज्यादा नवगठित सहकारी समितियों को भी पूर्व की तरह वित्तीय सहायता देने पर जोर दिया गया है,

सहकारी साख संरचना पर सीधा असर…

इस अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का सीधा और प्रतिकूल असर राजस्थान के सहकारी साख संरचना से जुड़े किसानों पर पड़ सकता हैं । मार्च का महीना, जो फसली सहकारी ऋण वितरण और वसूली के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, पूरी तरह ठप पड़ा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना अधर में लटक गई है। किसानों को खाद और बीज के वितरण में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिससे आगामी फसल चक्र प्रभावित होने की आशंका है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब उन्हें कोरे आश्वासनों की नहीं, बल्कि ठोस सरकारी आदेशों की प्रतीक्षा है।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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