सार
विधानसभा में विधायक के सवाल पर सहकारिता विभाग ने 100 से अधिक पृष्ठों में प्रस्तुत किया जवाब : मारवाड़ जंक्शन की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में करोड़ों रुपये के गबन का खुलासा किया है। ऑडिट में व्यवस्थापकों द्वारा फर्जी ऋण, वेतन हेराफेरी और अमानत राशि जमा न करने जैसी गंभीर अनियमितताएं मिली हैं।

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 14 फरवरी | सहकारिता विभाग द्वारा मारवाड़ जंक्शन विधानसभा क्षेत्र की ग्राम सेवा सहकारी समितियों (Pacs) में हुए करोड़ों रुपये के गबन और वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा खुलासा किया गया है । दरअसल राजस्थान विधानसभा के वर्तमान सत्र में विधायक (MLA) केसाराम चौधरी के सवाल पर सहकारिता विभाग द्वारा 13 फरवरी को जवाब प्रस्तुत किया गया है । जिसके अनुसार, मारवाड़ जंक्शन विधानसभा क्षेत्र की ग्राम सेवा सहकारी समितियों (Pacs) में से कई समितियों में गंभीर घोटाले सामने आए हैं, इनमें व्यवस्थापकों और सेल्समैनों द्वारा लाखों रुपये की हेराफेरी की गई है । हालांकि विभाग ने दोषी कार्मिकों के विरुद्ध राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 57 के तहत वसूली और कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है । मारवाड़ जंक्शन की 46 में से 06 प्रमुख समितियों में बड़े पैरा (अनियमितताएं) दर्ज किए गए हैं । वहीं, रानी गाँव, विशाल क्रेडिट को-ऑपरेटिव और उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव जैसी समितियों की पिछले 3 वर्षों से ऑडिट ही नहीं हुई है। विभाग ने लिखित जवाब के जरिए सदन में आश्वस्त किया है कि सभी लंबित ऑडिट जल्द पूरे किए जाएंगे और दोषियों से ब्याज सहित वसूली की जाएगी ।
10.54 लाख रुपये की वसूली के लिए कार्यवाही प्रस्तावित
सहकारिता विभाग द्वारा 100 से अधिक पृष्ठों में प्रस्तुत जवाब के अनुसार, बाड़सा ग्राम सेवा सहकारी समिति में व्यवस्थापक श्रवण कुमार द्वारा भारी अनियमितताएं की गई हैं । यहाँ वर्ष 2022-23 की ऑडिट में पाया गया कि 15.94 लाख रुपये की रोकड़ पोता राशि (कैश बैलेंस) चार्ज में ही नहीं सौंपी गई । इसके अलावा, वर्ष 2019-20 के दौरान कृषि आदान अनुदान के नाम पर 9.10 लाख रुपये, अधिक वेतन के रूप में 48,000 रुपये और गोदाम मरम्मत के फर्जी वाउचर बनाकर 96,000 रुपये का गबन किया गया । कुल मिलाकर 10.54 लाख रुपये की वसूली के लिए राजस्थान सहकारी संस्था अधिनियम 2001 की धारा 57 के तहत कार्यवाही प्रस्तावित की गई है ।
4.43 लाख रुपये का अंतर
सवराड ग्राम सेवा सहकारी समिति में भी इसी तरह का मामला सामने आया है । यहाँ के पूर्व व्यवस्थापक सोहनलाल के कार्यकाल में लगभग 4.43 लाख रुपये का अंतर पाया गया । सोहनलाल की मृत्यु के बाद, ऑडिट में पाया गया कि उनके द्वारा सदस्यों से वसूल की गई 3.68 लाख रुपये की राशि बैंक खाते में जमा ही नहीं की गई । इसमें भुण्डाराम, कीकाराम, रामलाल, नाराराम और कैलाश कंवर जैसे सदस्यों की जमा राशि शामिल थी । साथ ही, सेल्समैन भावेश द्वारा भी अमानत वापसी और वेतन के नाम पर 62,654 रुपये के गबन का मामला दर्ज किया गया है ।
लाखों के वेतन और अमानतों में खेल
सारण और बान्ता ग्राम सेवा सहकारी समितियों में पूर्व व्यवस्थापक खीवाराम भाटिया (जो वर्तमान में निलंबित हैं) के विरुद्ध गंभीर आरोप लगे हैं । रिपोर्ट के अनुसार, खीवाराम ने रोकड़ गबन, रसीदों को नकद बही में दर्ज न करने और अध्यक्ष की अनुमति के बिना वेतन भुगतान के माध्यम से कुल 13.73 लाख रुपये का गबन किया है । चौंकाने वाली बात यह है कि बान्ता समिति में निलंबन काल के दौरान भी उन्हें 11.69 लाख रुपये का वेतन भुगतान कर दिया गया, जिसके लिए बैंक से कोई सक्षम स्वीकृति नहीं ली गई थी । इसके अलावा, धनला ग्राम सेवा सहकारी समिति में स्टॉक की हेराफेरी का मामला सामने आया है, जहाँ सहायक व्यवस्थापक/सेल्समैन शंकरलाल से 6.69 लाख रुपये की स्टॉक गबन राशि वसूली जानी थी, जिसमें से अब तक केवल 3.20 लाख रुपये ही वसूल हो पाए हैं । इसी तरह बिजोवा समिति में व्यवस्थापक विक्रम सिंह भाटी के कार्यकाल में रोकड़ पोता में 19.24 लाख रुपये का भारी अंतर पाया गया है ।
फर्जी ऋण और किसानों के साथ धोखाधड़ी
ऑडिट रिपोर्ट में किसानों के नाम पर फर्जी ऋण उठाने और वितरण में हेराफेरी के कई उदाहरण दिए गए हैं । बिजोवा और अन्य समितियों में देखा गया कि बैंक शाखा से प्राप्त ऋण राशि और समिति की रोकड़ बही में दर्ज राशि में भारी अंतर है । उदाहरण के तौर परः गेनाराम पुत्र मगाराम के नाम पर 50,000 रुपये का फर्जी ऋण दर्शाया गया, जबकि बैंक से कोई राशि प्राप्त नहीं हुई थी । वही थ्रोंगाराम पुत्र चेनाराम के मामले में बैंक से 1.05 लाख रुपये प्राप्त हुए, लेकिन समिति की बहियों में अधिक राशि दर्शाकर अंतर का गबन कर लिया गया । तथा दरगाराम और नेनाराम जैसे किसानों के ऋण खातों में भी इसी तरह की विसंगतियां पाई गई हैं । कुल मिलाकर, जांच में गबन की राशि का आंकड़ा 88.86 लाख रुपये से अधिक तक पहुँच गया है ।
13.27 करोड़ रुपये की अमानत राशि जमा
विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र में पाली केन्द्रीय सहकारी बैंक से संबद्ध कुल 46 ग्राम सेवा सहकारी समितियां संचालित हैं। इन समितियों में कुल 42,144 सदस्य पंजीकृत हैं। इनमें से 42 समितियों के 28,632 सदस्यों की कुल 1327.58 लाख (लगभग 13.27 करोड़) रुपये की अमानत राशि जमा है। बीते 5 वर्षों में कुल 1759 सदस्यों पर अवधिपार ऋण बकाया है।
एक्सपर्ट व्यू
मारवाड़ जंक्शन से आई यह खबर राजस्थान के सहकारिता ढांचे की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है, जहाँ ’सहकार’ (साथ मिलकर काम करना) का अर्थ अब ’सह-कारनामा’ (मिलकर गबन करना) होता जा रहा है। विधानसभा में केसाराम चौधरी के सवाल ने उस ’दीमक’ को बेनकाब कर दिया है जो किसानों की खून-पसीने की कमाई को अंदर ही अंदर चाट रही है। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि रानी गाँव, विशाल और उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव जैसी समितियों की पिछले 3 साल से ऑडिट ही नहीं हुई। यह प्रशासनिक शिथिलता का चरम है। जब घर के दरवाजे खुले छोड़ दिए जाएँ, तो चोर को दोष देना तो महज रस्म अदायगी है। ऑडिट न होना भ्रष्टाचार के लिए ’ग्रीन कॉरिडोर’ बनाने जैसा है। जबकि बान्ता समिति के खीवाराम भाटिया ने तो सिस्टम का मजाक ही बना दिया। निलंबित होने के बावजूद 11.69 लाख रुपये का वेतन डकार जाना बिना ’ऊपरी आशीर्वाद’ के संभव नहीं है। यह भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि प्रशासनिक बेशर्मी का उत्कृष्ट उदाहरण है। विभाग कह रहा है कि ‘वसूली और कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है।’ लेकिन इतिहास गवाह है कि सहकारिता के मामलों में ’वसूली’ की फाइलें धूल फांकने में माहिर होती हैं। 88.86 लाख रुपये से ज्यादा का गबन और 13 करोड़ से अधिक की अमानत राशि दांव पर है। क्या विभाग वाकई ब्याज सहित वसूली कर पाएगा, या यह भी आश्वासन की एक और ’पोथी’ बनकर रह जाएगी?


