GRA व्यवस्था बंद… किसानों को नहीं मिल रहा फसली सहकारी ऋण योजना का लाभ

सार 

Rajasthan : ग्रिवेस रिड्रेसल आथोरिटी’ (GRA) की व्यवस्था फिलहाल राज्य में बंद, जिससे किसानों को ऋण मिलने में हो रही है खासी परेशानी, 26 हजार 445 खातो में GRA के माध्यम से वितरित किया गया था ऋण 

फोटो सोर्स: एआई जेनरेटेड। 

विस्तार 

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 13 जनवरी | कंडाके की ठंड में किसानों के हाथों की अंगुलियों में पड़ी झुर्रियां उन्हें फसली सहकारी ऋण योजना से वंचित कर रही है । इन दिनों राज्य सरकार की ब्याज मुक्त योजना के तहत ग्राम सेवा सहकारी समितियां (Pacs) द्वारा फाइनेंशियल इंक्लूजन गेटवे (FIG) पोर्टल के माध्यम से रबी सीजन का फसली सहकारी ऋण  वितरित किया जा रहा है । राजस्थान में ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण योजना (ST Loan) का लाभ लघु एवं सीमांत किसानों तक पहुंचाने के दावे चाहे जितने भी किये जायें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. इन दिनों ब्याज मुक्त योजना का लाभ लेने लिए कड़ाके की ठंड में किसानों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है । एक तरफ राज्य सरकार फसली सहकारी ऋण योजना का लाभ पहुंचाने किसानों तक के लिए दिन-रात प्रयास करती है । तो दूसरी तरफ डिजिटलीकरण का चोला ओढ़े बैठी एक शीर्ष सहकारी संस्था ने किसानों को इस ब्याज मुक्त योजना से दूर करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी । दरअसल राजस्थान की इस शीर्ष सहकारी संस्था ने करीब सात साल पहले एक फाइनेंशियल इंक्लूजन गेटवे (FIG) पोर्टल विकसित कर, राज्य सरकार की ब्याज मुक्त योजना में बायोमेट्रिक पद्धति लागू करते हुए ऋण वितरण एवं वसूली का कार्य प्रारम्भ किया । अब यह ही एफआईजी पोर्टल किसानों के लिए मुसीबत बन गया है. कभी सर्वर नहीं चलने से अवधिपार होने, कभी ऋण वसूली जमा करवाने के बाद भी पुनः ऋण नहीं मिलने जैसी परेशानियां से किसान त्रस्त है । इससे न सिर्फ किसानों की, बल्कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों (Pacs) के व्यवस्थापकों की परेशानी भी बढ़ गई है. इधर केंद्रीय सहकारी बैंक के जिम्मेदार भी इस समस्या से भली भांति परिचित है लेकिन वो इसे शीर्ष सहकारी बैंक का मामला बताकर खुद पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं ।

ग्रिवेस रिड्रेसल आथोरिटी व्यवस्था बंद 

वर्तमान में किसानों की खरीफ वसूली होने के बाद बायोमेट्रिक नहीं हो रही है । जिससे उन्हें रबी सीजन के ऋण से वंचित होना पड़ रहा है । चूंकि किसान दिन-रात खेत कार्य करते है । तो उनके हाथों की अंगुलियों में झुर्रियां आना लाजमी है । इन दिनों यह ही झुर्रियां किसान को फसली सहकारी ऋण प्रक्रिया से पृथक कर रही है । जब एफआईजी पोर्टल लागू किया गया, तब बयोमैट्रिक नहीं होने की स्थिती में ‘ग्रिवेस रिड्रेसल आथोरिटी’ (GRA) की व्यवस्था प्रारम्भ की गई । इस व्यवस्था के तहत बायोमेट्रिक में किसी प्रकार की समस्या होने पर ऋण वितरित किया जाता है। फिलहाल राज्य में इस व्यवस्था को बंद किया हुआ है । जिससे किसानों को ऋण मिलने में खासी परेशानी हो रही है ।

26 हजार 445 खातों में जीआरए से बांटा ऋण

केंद्रीय सहकारी बैंकों में ‘ग्रिवेस रिड्रेसल आथोरिटी’ (GRA) के माध्यम से ऋण वितरण पर रोक लगाई गई है । इसको लेकर राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (RSCB) की ओर से एक आदेश जारी किया गया है । जिसमें बताया गया है कि 32 लाख 96 हजार 523 खातों में से 26 हजार 445 खातो में ‘ग्रिवेस रिड्रेसल आथोरिटी’ (GRA) के माध्यम से ऋण वितरित किया गया है । हालांकि अब जीआरए प्रकरणों में नियमांतर्गत ऋण वितरण का शाखावार परीक्षण बैंक के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा करवाया जाएगा । साथ ही, किसी प्रकार की विसंगति होने की स्थिती में अपेक्स बैंक को सूचित किया जाएगा ।

127 करोड़ से अधिक का जीआरए से बांटा गया ऋण

राजस्थान राज्य सहकारी बैंक से प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 26 हजार 445 खातों में 127 करोड़ से अधिक का ऋण बांटा गया । जिसमें सर्वाधिक सवाई माधोपुर सीसीबी द्वारा 4598, बाड़मेर सीसीबी द्वारा 4465, जयपुर सीसीबी द्वारा 3135, हनुमानगढ़ सीसीबी द्वारा 1695, भीलवाड़ा सीसीबी द्वारा 1624, चूरू सीसीबी द्वारा 1289, नागौर सीसीबी द्वारा 1238 तथा जोधपुर सीसीबी द्वारा 894, श्रीगंगानगर सीसीबी द्वारा 816, बांसवाड़ा सीसीबी द्वारा 711, इसी प्रकार कोटा सीसीबी द्वारा 663, बूंदी सीसीबी द्वारा 626, अलवर सीसीबी द्वारा 624, सीकर सीसीबी द्वारा 605 और झालावाड़ सीसीबी द्वारा 491, चित्तौड़गढ़ सीसीबी द्वारा 401, डूंगरपुर सीसीबी द्वारा 399, जैसलमेर सीसीबी द्वारा 378, अजमेर सीसीबी द्वारा 243, टोंक सीसीबी द्वारा 232, उदयपुर सीसीबी द्वारा 209 एवं भरतपुर सीसीबी द्वारा 197, बीकानेर सीसीबी द्वारा 187, पाली सीसीबी द्वारा 172, झुंझुनूं सीसीबी द्वारा 169, बारां सीसीबी द्वारा 143, जालोर सीसीबी द्वारा 137, दौसा सीसीबी द्वारा 101 इसके अलावा सिरोही सीसीबी द्वारा महज 3 खातों में जीआरए के माध्यम से ऋण वितरित किया गया ।

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