सार
Rajasthan : कर्ज माफी के विलंब भुगतान पर 8 प्रतिशत की दर से ब्याज देने की राज्य सरकार ने की घोषणा, अब तक 1391 करोड़ की राशि में से 624 करोड़ का ही हुआ भुगतान, हालांकि 765 करोड़ की राशि अब तक बकाया

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 8 जनवरी | राज्य सरकार ने वर्ष 2018-19 में कृषक ऋण माफी योजना लाकर, प्रदेश में ग्राम सेवा सहकारी समितियां (Pacs) से अल्पकालीन फसली ऋण (ST Loan) प्राप्त करने वाले कृषकों की ऋण माफी की । जिसके बाद 29 केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCB) को विलंब भुगतान पर 8 प्रतिशत की दर से ब्याज देने की भी घोषणा की । जिसके उपरांत 23 अप्रैल 2025 तक ब्याज पेटे 1391 करोड़ की राशि बनी, जिसमें से 624 करोड़ की राशि का सरकार स्तर से पूर्व में भुगतान किया जा चुका हैं । हालांकि 765 करोड़ रुपए बकाया हैं, जो केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCB) को समय पर नहीं मिलने से यह राशि उनके ही सिर का बोझ बन गई हैं ।
क्योकि पिछले कई सालों से केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCB) की लेखा पुस्तिका में उस राशि को ’’राज्य सरकार से प्राप्य’’ मद में दर्शाया जा रहा था । तो भारतीय रिजर्व बैंक (RB) ने ’’राज्य सरकार से प्राप्य’’ मद की राशि को लेकर 31 दिसंबर 2024 को एक परिपत्र जारी कर, केंद्रीय सहकारी बैंकों को इस मद में दर्शाई राशि का 31 मार्च 2025 तक फिजिकली प्राप्त नहीं होने पर बैकों से शत-प्रतिशत प्रावधान करने का स्पष्ट निर्देश दिया । जिसके उपरांत बैंको को अपने वित्तीय संसाधनों से बकाया राशि का प्रावधान करना पड़ा हैं। अब इस स्थिती को लेकर सहकार नेता सूरजभानसिंह ने केंद्र की नोडल बैंक (एजेंसी) के रूप में नाबार्ड की ओर रुख किया है ।
दरअसल, सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा के साथ सचिव भंवर बोसाना, अध्यक्ष मुकेश कुमार पिपलीवाल ने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (Nabard) राजस्थान के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) रवि बाबू से मुलाकात की । उन्होने बकाया 765 करोड़ रुपए की राशि को लेकर केंद्र की नोडल बैंक (एजेंसी) के रूप मे राज्य सरकार को पत्र लिखने का अनुरोध किया है । जिस पर नाबार्ड सीजीएम ने राज्य सरकार के शीर्ष स्तर के साथ वार्ता कर पत्र लिखने की सहमति प्रदान की है ।
सहकारी बैंकों की स्थिती से RBI को अवगत कराएंगे
आरबीआई के आदेश पर केंद्रीय सहकारी बैंकों ने अमल करते हुए ’’राज्य सरकार से प्राप्य’’ मद में दर्शाई बकाया राशि का प्रावधान किया । जिसके बाद केंद्रीय सहकारी बैंकों की हालात यथा हानि, सीआरएआर, पुनर्वित्त की स्थिति पर सहकार नेता ने नाबार्ड सीजीएम को अवगत कराया । जिस पर, सीजीएम रवि बाबू द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक को इस स्थिती से अवगत कराने की बात कही गई । साथ ही आमेरा द्वारा सीसीबी में योग्य एवं पात्र पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक लगाने की मांग रखी गई । तो सीजीएम ने बताया कि स्टेट लेवल टास्क फोर्स (SLTF) बैठक में PCS-RCS के चर्चा की जाती है । लेकिन अब आरबीआई को भी सूचित किया जाएगा । उन्होने कहा कि प्रबंधकीय अकुशलता के कारण ही सहकारी बैंक आर्थिक तौर से कमजोर हो रहें हैं ।
CGM ने पैक्स के काम को सराहा और सीसीबी पर निराशा व्यक्त की
नाबार्ड सीजीएम और सहकार नेता के मध्य लंबी वार्ता चली । जिसमें सीजीएम ने कोटा और अजमेर जिले में पिछले दिनों सीसीबी और पैक्स के विजिट के ऑब्जरवेशन को भी साझा किया और कुछ पैक्स के काम को सराहा और सीसीबी की दृष्टि से कुछ निराशा व्यक्त की । इसके अलावा, सहकार नेता सहकारी भूमि विकास बैंकों के आर्थिक पुनरुद्धार में नाबार्ड द्वारा सकारात्मक सहयोग करने एवं नाबार्ड के स्तर से रोकी हुई पुनर्वित्त सुविधा जारी करने की भी मांग रखी । साथ ही ओटीएस योजना में दिसम्बर तक प्रगति से अवगत कराते हुए बताया कि अब तक इस योजना के तहत 297 करोड़ की वसूली की गई है । जिसकी सीजीएम ने सराहना करते हुए ब्रीफ नोट (Success Story) भी मांगा, ताकि नाबार्ड मुख्यालय को भी पीएलडीबी पुनर्वित्त जारी करवाने की मांग से अवगत कराकर, पैरवी की जा सकें ।


