- देश में आज लगभग 8,55,000 कोऑपरेटिव चल रहे हैं, 1,77,000 क्रेडिट सोसाइटी हैं, अन्य 700,000 सहकारी समितियां हैं, 17 राष्ट्रीय स्तर के सहकारी संघ हैं, 33 स्टेट कोऑपरेटिव बैंक हैं, 63,000 से ज्यादा एक्टिव पैक्स हैं और 12 करोड से ज्यादा सदस्य हैं और लगभग 91% गांवों में आज कोऑपरेटिव्स की उपस्थिति है
- ग्रामीण विकास और गरीब व्यक्तियों को रोज़गार देने में, वो सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें, ऐसा एक आर्थिक मॉडल बनाने में, सहकारिता की एक बहुत बड़ी भूमिका रही

नई दिल्ली I 13 अप्रैल I भारत सरकार देश में सहकारिता को बढ़ावा देने की योजना बना रही है. जिसकी तैयारियां भारत सरकार ने शुरू कर दी हैं. इसी कड़ी में मंगलवार 12 अप्रैल से दिल्ली में सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन शुरू हो गया है. दो दिवसीय इस सम्मेलन का मुख्य मकसद देश में सहकारिता के लिए राष्ट्रीय नीति तैयार करना है. जिसके लिए देशभर से सहकारिता के दिग्गज समेत राज्य सरकार के प्रतिभागियों ने सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं. मंगलवार को सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया. इस दौरान उन्होंंने अपने संबोधन में कहा कि आज की चुनौतियों के लिए सहकारिता और सहकारिता आंदोलन को तैयार करना होगा. साथ ही उन्होंने कहा कि हमें पारदर्शिता लानी पड़ेगी, तभी जाकर छोटे से छोटे किसान का भरोसा हम पर बढ़ेगा.
उर्वरक वितरण में सहकारिता का 35 फीसदी योगदान
सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह व सहाकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के विकास में सहकारिता के योगदान को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि देश के विकास में सहकारिता का बहुत योगदान है. जिसके तहत एग्रीकल्चर फाइनेंस में सहकारिता का योगदान 25 फीसदी है. इसी तरह उर्वरक वितरण में 35 फीसदी, खाद उत्पादन 25 फीसदी, चीनी उत्पादन 3 फीसदी, दूध की खरीद व उत्पादन 25 फीसदी, गेहूं की खरीद में 30 फीसदी, धान की खरीद में 20 फीसदी और मछली उत्पादन में 21 फीसदी योगदान सहकारिता का है.
51 फीसदी गांवों में सहकारिता की मौजूदगी, दो दिनों में बेबसाइट पर होगा नीति का प्रारूप
गृह व सहाकारिता मंत्री अमित शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश में आज 8 लाख 55 सहकारिता संस्था अच्छी चल रही हैं. वहीं 1 लाख 77 हजार क्रेडिट सोसायटी चल रही हैं. जबकि अन्य 7 लाख सहकारी समितियांं हैं. उन्हाेंने कहा कि देश में राष्ट्रीय स्तर के 17 सहकारी संघ हैं. जबकि 33 ट्रेड सहकारी बैंक हैं. उन्होंने कहा कि देश की 12 करोड़ से ज्यादा लोगों सहकारिता से जुड़े हुए हैं. वहीं देश के 51 फीसदी गांव में सहकारिता संस्थाओं की मौजूदगी है. अमित शाह ने कहा कि सहकारिता की नई नीति का प्रारूप दो दिनों में सभी भाषाओं में सहकारिता की वेबसाइट पर होगा, जिसमें सभी लोग अपने सुझाव दे सकेंगे.
देश में पहली बार बना है सहकारिता मंत्रालय
गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता पर राष्ट्रीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि नई सहकारिता नीति पर विचार मंथन के लिए यह सम्मेलन आयोजित किया गया है. उन्होंंने कहा कि सहकारिता के लिए अलग मंत्रालय की गठन की मांग पुरानी थी. इस कड़ी में 6 जुलाई 2021 का दिन विशेष था, इसी दिन भारत में पहली बार सहकारिता मंत्रालय बना. उन्होंने कहा कि कानून के नजरिये से देखे तो 1904-05 से देश में सहकारिता शुरू हुई. इन 100 साल के इतिहास में सहकारिता का बड़ा योगदान रहा है. आजादी के आंदोलन के दौरान कुछ जगह तो सहकारिता ने अंग्रेज सरकार के खिलाफ एक आर्थिक मॉडल खड़ा करने का प्रयास भी किया.


