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पंचायती राज चुनाव 2026: नए प्रशासनिक स्वरूप में सांचौर का सियासी पारा हाई, इतिहास के पन्नों से तय होगी नई बिसात।

सार

सांचौर पंचायत समिति चुनाव-2026 के तहत 3 नवंबर को मतदान और 20 नवंबर को मतगणना होगी। प्रधान पद अनारक्षित होने से राजनीतिक सरगर्मी तेज है। प्रशासनिक पुनर्गठन के चलते क्षेत्र विभाजित हुआ है, फिर भी इसका ऐतिहासिक और राजनीतिक रसूख बरकरार है।

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​जालोर/सांचौर | चुनावी डेस्क, 6 अक्टूबर |राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान (Rajasthan State Election Commission) द्वारा पंचायतीराज आम चुनाव-2026 के कार्यक्रमों की आधिकारिक घोषणा के साथ ही सांचौर पंचायत समिति का राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। आयोग के निर्देशानुसार, सांचौर पंचायत समिति के चुनाव तीसरे चरण के तहत संपन्न होंगे, जिसके तहत 3 नवंबर 2026 को मतदान और 20 नवंबर 2026 को मतगणना होगी। इस बार सांचौर पंचायत समिति का प्रधान पद अनारक्षित (सामान्य) घोषित किए जाने से भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों ही प्रमुख दलों में टिकट के दावेदारों की लंबी फौज खड़ी हो गई है।सांचौर पंचायत समिति का इतिहास बेहद गौरवशाली और गतिशील रहा है। कृषि बाहुल्य नेहड़ क्षेत्र और सांचौर बेसिन अपनी उपजाऊ भूमि तथा सांचौर से गुजरने वाली नर्मदा नहर परियोजना व लूनी नदी के भौगोलिक व ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के लिए जाना जाता है। किसी जमाने में सांचौर का भूभाग अत्यंत विशाल था, जहां वर्ष 2010 तक 63 ग्राम पंचायतें शामिल थीं और ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये का सालाना बजट आवंटित होता था। प्रशासनिक सुगमता के लिए समय के साथ इस वृहद क्षेत्र का भूभाग विभाजित होता गया; परिणामस्वरूप वर्ष 2010 के बाद चितलवाना, वर्ष 2020 में सरनाऊ और अब भादरूणा व सरवाना नई पंचायत समितियां अस्तित्व में आ चुकी हैं।नेतृत्व के इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 1959 में सुमेरसिंह अरणाय ने इसके पहले प्रधान के रूप में कमान संभाली थी। उनके बाद क्रमिक रूप से कनकराम मेहता (1961), मिश्रीमल चन्दन (1965), वन्नेसिंह गोहिल (1970), नरेन्द्र कुमार विश्नोई (1988), भूरीदेवी माली (1995), सुखराम विश्नोई (2000), प्रतापसिंह गुन्दाऊ (2005-2010), डॉ. शमशेर अली सैयद (2010), टाबाराम मेघवाल (2015) और वर्ष 2020 में श्रीमती कैलाश प्रधान पद पर निर्वाचित हुईं।इस राजनीतिक इतिहास में महिला नेतृत्व के रूप में केवल दो बार—वर्ष 1995 में भूरीदेवी माली और वर्ष 2020 में श्रीमती कैलाश का प्रधान पद पर आसीन होना मील का पत्थर साबित हुआ, जिन्होंने ग्रामीण सत्ता में महिलाओं की मजबूत भागीदारी की ऐतिहासिक मिसाल पेश की। इस बार ECIL निर्मित मल्टी पोस्ट सिंगल वोट (MPSV) EVM के जरिए होने वाले इन चुनावी मुकाबलों के बीच जनता का समर्थन हासिल कर कौन बाजी मारता है, यह देखना बेहद रोमांचक होगा।

​ प्रशासनिक पुनर्गठन और बदलता भूगोल: चितलवाना, सरनाऊ से लेकर भादरूणा व सरवाना तक का सफर

​सांचौर क्षेत्र के प्रशासनिक और भौगोलिक स्वरूप में पिछले एक दशक में अभूतपूर्व बदलाव आए हैं, जिसने स्थानीय चुनावों के आयामों को भी पूरी तरह बदल दिया है। एक समय था जब सांचौर पंचायत समिति के अंतर्गत कुल 63 ग्राम पंचायतें आती थीं और इसका भूभाग अत्यधिक विस्तृत था, जिसके प्रबंधन के लिए भारी-भरकम बजट और केंद्रीय योजनाएं संचालित होती थीं।समय के साथ ग्रामीण आबादी की बढ़ोतरी और प्रशासनिक सुगमता की मांग को देखते हुए सरकार ने इस वृहद क्षेत्र का विकेंद्रीकरण शुरू किया। इसी कड़ी में वर्ष 2010 के पश्चात चितलवाना पंचायत समिति का नया गठन किया गया, जिससे सांचौर का दायरा कुछ सिमटा। इसके बाद विकास की गति और क्षेत्रीय जरूरतों को पूरा करते हुए वर्ष 2020 में सरनाऊ नई पंचायत समिति के रूप में अस्तित्व में आई, और अब वर्तमान पंचायतीराज चुनाव 2026 के परिप्रेक्ष्य में भादरूणा तथा सरवाना भी एक नई पंचायत समिति के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। इन लगातार प्रशासनिक विभाजनों के बावजूद मूल सांचौर पंचायत समिति का राजनीतिक रसूख और ऐतिहासिक महत्व आज भी बरकरार है, और हर बार बदलते भूगोल के साथ यहां का चुनावी रण और अधिक रोचक होता जा रहा है।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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