
जोधपुर । डिजिटल डेस्क I 8 अगस्त I हाईकोर्ट ने प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समिति के संचालक मण्डल और पदाधिकारियों के चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इस को लेकर दायर 94 याचिकाओं को निस्तारित कर दिया हैं। इसके चलते सहकारी समिति के चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश विजय विश्नोई ने सुनवाई करते हुए संबंधित सहकारी समितियों के संचालक बोर्ड के सदस्यों का चुनाव परिणाम, रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखा है।
रजिस्ट्रार द्वारा ग्राम सेवा सहकारी समिति के उपनियम संशोधन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। प्रदेश में ग्राम सेवा सहकारी समितियों में संशोधन से पहले, सहकारी समितियों के सभी सदस्यों में से ऋणी श्रेणी से 11 सदस्यों और गैर-ऋणी श्रेणी से एक सदस्य का चुनाव करने के हकदार थे, हालांकि, अब के उप-नियमों में संशोधन अनुसार संचालक बोर्ड के सदस्यों का चुनाव वार्डवार, इस पर सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि उप-नियमों में संशोधन आनुपातिक प्रतिनिधित्व देने के इरादे से पेश किया गया है और ऐसी परिस्थितियों में, यह नहीं कहा जा सकता है कि यह समाज के हित के लिए हानिकारक है। सुनवाई के दौरान न्यायालय में तर्क दिया गया कि राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण द्वारा 31 जुलाई को प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में चुनाव की अधिसूचना के तहत समितियों की संचालक बोर्ड के सभी सदस्यों के चुनाव का कार्यक्रम पहले ही जारी किया जा चुका है। साथ ही हाईकोर्ट ने निर्णय मे कहा कि एक बार चुनाव की अधिसूचना के बाद चुनाव पर रोक लगाना उचित नहीं होगा।


