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कैबिनेट ने दी मंजूरी : देश भर की 8.54 लाख रजिस्टर्ड कोऑपरेटिव और उससे जुड़े 27 करोड़ सदस्यों को मिलेगा फायदा 

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GeM के जरिए खरीद कर सकेंगी सहकारी समितियां

नई दिल्ली । डिजिटल डेस्क I 2 जून I सहकारी समितियां अब गर्वनमेंट ई मार्केटप्लेस यानि जीईएम के जरिए खरीद कर सकेंगी. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में ने जीईएम का विस्तार कर उसमें सहकारी समितियों को खरीदार के रूप में जोड़ने को मंजूरी दे दी है. इस फैसले से सहकारी समितियों को खरीद के लिए आकर्षक दरें मिल सकेंगी. सरकार के द्वारा जारी बयान के अनुसार इस फैसले से देश भर की 8.54 लाख रजिस्टर्ड कोऑपरेटिव और उससे जुड़े 27 करोड़ सदस्यों को फायदा मिलेगा. जीईएम पोर्टल देश भर के खरीदारों और विक्रेताओं के लिए खुला है. हालांकि इसमें खरीदार के रूप में अब तक सरकारी संस्थान, केंद्र और राज्य के मंत्रालय, विभाग, पीएसयू ही शामिल हो सकते थे. फैसले के बाद अब सहकारी समितियां भी खरीदार बन सकेंगी. वहीं दूसरी तरफ विक्रेता पक्ष में सरकार और निजी कोई भी शामिल हो सकता है.

क्या होगा फैसले का असर

सरकार के मुताबिक जीईएम तेज खरीदारी में मदद करने वाला पारदर्शी सिस्टम है, जिसमें अब सहकारी समितियां भी जुड़ेंगी. इसकी मदद से कोऑपरेटिव को पारदर्शी तरीके से आकर्षक दरें मिल सकेंगी. सरकार के मुताबिक इस कदम से न केवल सहकारी समितियों और उससे जुड़े लोगों को आर्थिक फायदा प्रदान करेगा. साथ ही इससे समितियों को लेकर भरोसा भी बढ़ेगा. सहकारी समितियों की लिस्ट को सहकारिता मंत्रालय और जीईएम स्पेशल पर्पज व्हीकल के साथ बातचीत कर तैयार किया जाएगा और इसे बढ़ाया जाएगा. सहकारिता मंत्रालय सहकारी समितियों को पोर्टल से जुड़ने में प्रोत्साहित करने के लिए जरूरी सलाह भी जारी करेगा.

क्या है सरकारी ई-मार्केटप्लेस

जीईएम यानि सरकारी ई-मार्केटप्लेस एक स्पेशल पर्पज व्हीकल है जो 9 अगस्त 2016 को लॉन्च हुआ था. इसका उद्देश्य सरकारी खरीदारों और देश भर के विक्रेताओं को एक पारदर्शी मंच देना था. इसकी मदद से सरकार का उद्देश्य सरकारी खरीद में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना और खरीद को तेज और पारदर्शी बनाना है. एक प्लेटफॉर्म देने से सरकारी खरीदारों को बेहतर दरें भी मिलती हैं. सरकार के मुताबिक प्लेटफॉर्म के जरिए ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू यानि जीएमवी 2018-19 से 2021-22 के बीच 84.5 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ी है. 2021-22 में जीएमवी 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई है. अलग अलग सालों के आंकड़ों को देखें तो 2018-19 में सालाना जीएमवी 16,972 करोड़ रुपये, 2019-20 में सालाना जीएमवी 22,580 करोड़ रुपये, 2020-21 में सालाना जीएमवी 38,280 करोड़ रुपये और 2021-22 में सालाना जीएमवी 1.06 लाख करोड़ रुपये रहा है.

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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