
बाड़मेर । डिजिटल डेस्क I 20 अगस्त I बाड़मेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अधीन संचालित 349 ग्राम सेवा सहकारी समिति (जीएसएस) में से केवल 130 समितियों के चुनाव को लेकर इकाई रिटर्निग अधिकारी व उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, बाड़मेर (Unit Returning Officer and Deputy Registrar, Co-operative Societies, Barmer) ने चुनाव कार्यक्रम जारी कर तैयारियां शुरू कर दी है। लेकिन 219 ग्राम सेवा सहकारी समिति का चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं होने से जिले की इन 219 सहकारी समितियों में चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (State Co-operative Election Authority) ने 1 अगस्त को ही प्रदेश में निर्वाचन योग्य और निर्वाचन ड्यु ग्राम सेवा सहकारी समिति में चुनाव कार्यक्रम जारी कर निर्वाचन प्रक्रिया को 26 अगस्त से शुरु कर 29 सितम्बर तक पांच चरणों में चुनाव करवाने के दिशा-निर्देश जारी किए है।
दरअसल, बाड़मेर जिले में 349 ग्राम सेवा सहकारी समिति (जीएसएस) का संचालन हो रहा है। वही, वर्ष-2011 के बाद अब चुनाव हो रहें है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव होने की उम्मीद जगने के बाद राजनीति से जुड़े लोग भी सक्रिय हो गए है। एक दशक पहले हुए चुनाव के दौरान निर्वाचित हुए सदस्यों व अध्यक्षों का कार्यकाल वर्ष-2016 में पूर्ण हो गया था, लेकिन उसके बाद सरकार ने चुनाव करवाए नहीं थे। लेकिन अब जिले में केवल 130 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के चुनाव का कार्यक्रम जारी होने से सहकारिता आंदोलन से जुड़े सुत्रो (Sources related to cooperative movement) ने जिले में निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई तरह के सवाल उठाए है।
नए प्रतिनिधित्व से किसानों को राहत
समितियों की जिम्मेदारी एक दशक से एक ही आदमी के पास है। ऐसे में अध्यक्षों व व्यवस्थापकों के बीच लंबे समय से चुनाव नहीं होने पर सांठ-गांठ हो गई है। ऐसे में गबन की शिकायतें भी होती रहती है। लेकिन चुनाव होने के बाद नए प्रतिनिधित्व को कमान मिलेगी। ऐसे में किसानों की हर समस्या पर सुनवाई होगी। साथ ही सहकारी समितियों से जुड़े काम होने में भी आसानी रहेगी।
जिले में हर साल 800 करोड़ का कर्ज बांटती है सहकारी समितियां
ग्राम सेवा सहकारी समितियों का संचालन ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहा है। यह समिति गांव में मिनी बैंक की तरह काम करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को फसली ऋण उपलब्ध करवाने के साथ-साथ खाद-बीज भी मुहैया करवाती है। इसके अलावा किसान आय की बचत भी समिति में जमा करवा सकते है। समितियों का 90 फीसदी लेन-देन किसानों से रहता है। बाड़मेर जिले में करीब दो लाख किसानों को 800 से 900 करोड़ फसली ऋण हर साल वितरित किया जाता है। जिसमें अकाल व फसल खराबा होने के बाद सरकार ब्याज व मूल राशि में भी राहत प्रदान करती है।
फैक्ट फाइल
- बाड़मेर जिले में कुल 349 ग्राम सेवा सहकारी समितियां।
- वर्ष 2018 में 14 ग्राम सेवा सहकारी समिति में हुआ था चुनाव ।
- 2011 में हुए चुनाव के दौरान थी 242 ग्राम सेवा सहकारी समितियां।
- 11 साल में नवीन बनी है 107 ग्राम सेवा सहकारी समिति।
- हर साल दो लाख किसानों को मिलता है 800 करोड़ का फसली ऋण।
कार्यक्रम जारी, लेकिन आधा-अधुरा
“जिले में सहकारी समितियों के चुनाव को लेकर केवल 130 समितियों में चुनाव का कार्यक्रम जारी किया है। जबकि बाड़मेर जिले में अब 349 समितियां है, जहां संचालक मंडल के सदस्यों व अध्यक्षों के चुनाव पांच चरणों में करवाए जाने के राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण ने दिशानिर्देश जारी किए है। लेकिन बाड़मेर जिले में आधा-अधुरा निर्वाचन कार्यक्रम जारी होने पर चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।”
– सहकारी साख आंदोलन से जुड़े सुत्र, बाड़मेर।


