ग्राम सेवा सहकारी समिति (जीएसएस) में संचालक मण्डल के निर्वाचन में समिति स्तर से व्यय होगा चुनावी खर्चा

In the election of the Board of Directors in the Village Service Co-operative Society (GSS), the election expenses will be spent from the Society level.

जोधपुर । डिजिटल डेस्क I 24 अगस्त I जोधपुर संभाग की निर्वाचन योग्य और निर्वाचन ड्यू ग्राम सेवा सहकारी समिति (जीएसएस) में एक दशक बाद होने वाले चुनावों को लेकर राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (Rajasthan State Cooperative Election Authority) की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके लिए राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण कार्यालय से जारी आदेश में निर्वाचन प्रक्रिया में ग्राम सेवा सहकारी समिति (जीएसएस) में होने वाले चुनाव का खर्चा अब समिति स्तर से व्यय किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि इन ग्राम सेवा सहकारी समिति (जीएसएस) में हिस्सा राशि के रूप में ग्रामीणों का पैसा लगा हुआ है । इससे सहकारी समिति (जीएसएस) में जहां उनका लाभांश घटेगा, वही घाटे का भार भी उन्हें ही भुगतना होगा । यह फैसला इसलिए भी अजीब है कि एक तरफ तो पिछले समय में ऋण माफी योजना के बाद बैंकों के पास वित्तीय संसाधन के अनुरुप फसली ऋण वितरण (crop loan disbursement) में कटौती के चलते घटते ब्याज मार्जीन से पैक्स-लैम्पस (pacs-lamps) का आर्थिक ढांचा चरमराया हुआ हैं । हालांकि इससे पहले विभाग अपने स्तर पर सहकारी समिति (जीएसएस) के चुनाव कराता था । इन चुनाव में लगने वाले विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपना टीएडीए विभाग से ही ले लेते थे । अब यह राशि भी सहकारी समिति (जीएसएस) से ही वसूली जाएगी । वहीं चुनाव का खर्चा इन पर डालकर इनके घाटे को ओर बढ़ाया जा रहा है ।

दैनिक भत्ता भी समिति से देय

राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण ने चुनाव के लिए नियुक्त पर्यवेक्षण अधिकारी, निर्वाचन अधिकारी, मतदान कार्मिक, मतगणना कार्मिक, सहायक मतदान कार्मिक के दैनिक भत्तों और यात्रा बिलों का भुगतान भी समिति से करने के निर्देश दिए हैं । वही, निर्वाचन कार्य में नियुक्त किसी भी कार्मिक को स्वंय की संस्था/कार्यालय से दैनिक भत्ता नहीं दिया जाएगा ।

11 साल बाद चुनाव होने से फायदा

करीब 11 सालों से एक ही व्यक्ति सहकारी समिति की बागडोर संभाल रहा था। खण्ड में कई जगह समिति अध्यक्ष और व्यवस्थापकों की सांठ-गांठ से गबन के मामले उजागर हो रहे हैं। नए प्रतिनिधि चुने जाने से इस पर काफी हद तक रोक लगेगी। वही, एक दशक से एक ही सीट पर जमे अध्यक्ष किसानों की समस्याओं के समाधान को लेकर भी गंभीरता नहीं दिखा रहे। ऐसे आरोप समय-समय पर किसान लगाते रहते हैं। नए लोगों को प्रतिनिधित्व मिलने से कार्य में तेजी आएगी।

इनका कहना हैं

‘‘पैक्स-लैम्पस कार्मिकों के अनुसार प्रदेश में लगभग 80 फ़ीसदी ग्राम सेवा सहकारी समिति (जीएसएस) की हालत बहुत ज्यादा खराब है । अधिकांश सहकारी समितियां घाटे में चल रही है । कई पैक्स-लैम्पस में कर्मियों को वेतन भत्ते चुकाने तक का संकट है ।’’

-नंदलाल वैष्णव, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ

‘‘ग्राम सेवा सहकारी समितियां पहले ही घाटे में चल रही है । इनमें ग्रामीणों का पैसा लगा है । अब उनका लाभांश तो घटेगा ही, उन्हें घाटे का भार भी सहना पड़ेगा ‌। केवल ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर चुनाव खर्च का बोझ डालना उनके लिए कोढ में खाज के समान है ।’’

-रायमलराम नेहरा, जिला अध्यक्ष, सहकारी समितियां व्यवस्थापक यूनियन, यूनिट बाड़मेर

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