किसानों को आधा-अधुरा मिल रहा हैं फसली सहकारी ऋण

  • अल्पकालीन फसली सहकारी ऋण साख सीमा के अनुरुप नहीं मिल रहा पूरा ऋण
  • सेठ-साहूकारों के चंगुल में फंसने को मजबूर किसान
  • पहले अकाल, अब ऋण खाते हो गए अवधिपार 
किसानों को आधा-अधूरा ऋण, फसल बुवाई का संकट

बाड़मेर । डिजिटल डेस्क । 26 मई । अकाल की मार से जूझ रहे सीमावर्ती जिले के किसान अब खुद को संभालने के लिए खेतों की ओर रुख कर रहे हैं । लेकिन, ऋण की प्रक्रिया में उलझने से खरीफ की बुवाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। किसानों को सहकारी साख संरचना पर बैंक से फसली ऋण पूरा नहीं मिल रहा है। आधा अधूरा ही ऋण मिलने से किसान पशोपेश में है। इधर, आर्थिक संकट से घिर रहे किसान अब सेठ-साहूकारों से ऋण लेने को मजबूर हो रहे हैं।
दी बाड़मेर सेन्ट्रल को- ऑपरेटिव बैंक, ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ऋण का वितरण करती है। जिले भर में ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 2 लाख 35 हजार 513 किसानों का रजिस्ट्रेशन हो रखा है। बैंक ने अभी तक जिले में 35 हजार 777 किसानों को 85 करोड़ रुपए का खरीफ फसली ऋण दे दिया है। बैंक को 825 करोड़ रुपए फसली ऋण वितरण का लक्ष्य है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक किसानों को खरीफ फसली ऋण दिया जा रहा है। किसानों को 31 जुलाई तक फसली ऋण दिया जाएगा।

ऋण की सीमा घटाई

गत वर्ष खरीफ सीजन में जिस किसान को 71758 रुपए का ऋण दिया गया था, वुसली जमा करवाने के बाद ऋण में कटौती कर उस ही किसानों को 63753 रुपए का ऋण दिया गया है। जिले में जिन किसानों की साख सीमा एक लाख 50 हजार रुपए है। उन किसानों को इस वर्ष ऋण में कटौती कर के ऋण वितरण किया जा रहा हैं ।
उल्लेखनीय है कि जिले में खरीफ ऋण देय की तिथि में 365 दिनों की बाध्यता में ऋण चुकारा नहीं करने वाले जिले के हजारों किसानों को मय ब्याज सहित सहकार जीवन सुरक्षा बीमा प्रीमियम, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, फसल बीमा प्रीमियम की राशि वहन करनी पड़ रही हैं ।

पूरा ऋण नहीं मिला

अल्पकालीन फसली ऋण की साख सीमा 1 लाख 50 हजार रुपए की है। लेकिन इस बार खरीफ फसल बुवाई के लिए अधिकतम 70 से 65 हजार रुपए का ही ऋण मिला है। रुपए पूरा नहीं मिलने के कारण फसल बुवाई में परेशानी आएंगी। -स्थानीय किसान

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