सहकारी समितियों के निर्वाचन प्रक्रिया में समिति स्तर से ही होगा चुनाव का खर्च


जयपुर । डिजिटल डेस्क ! 1 मार्च ! प्रदेश में जल्द ही ग्राम सेवा सहकारी समितियों के चुनाव करवाए जा सकते हैं। राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण, ग्राम सेवा सहकारी समितियों में चुनाव की तैयारी में जुट गया है। इसके लिए राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण कार्यालय से जारी आदेश में निर्वाचन प्रक्रिया में ग्राम सेवा सहकारी समितियों में होने वाले चुनाव का खर्चा अब समिति स्तर से व्यय किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि इन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में हिस्सा राशि के रूप में ग्रामीणों का पैसा लगा हुआ है । इससे सहकारी समितियों में जहां उनका लाभांश घटेगा, वही घाटे का भार भी उन्हें ही भुगतना होगा । यह फैसला इसलिए भी अजीब है कि एक तरफ तो पिछले दो सालों से प्रदेश में संचालित पैक्स / लेम्प्स में अल्पकालीन फसली ऋण वितरण व्यवस्था में कटौती के चलते घटते ब्याज मार्जीन से सहकारी समितियों का आर्थिक ढांचा चरमराया हुआ हैं । वहीं चुनाव का खर्चा इन पर डालकर इनके घाटे को ओर बढ़ाया जा रहा है ।हालांकि ग्राम सेवा सहकारी समितियों में इस बार करीबन 12 साल बाद चुनाव होने हैं । इस बार भी चुनाव राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के माध्यम से कराए जाएगें। इससे पहले विभाग अपने स्तर पर संस्थाओं के चुनाव कराता था । इन चुनाव में लगने वाले विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपना टीएडीए विभाग से ही ले लेते थे । अब यह राशि भी संस्थाओं से ही वसूली जाएगी ।

इनका कहना हैं

“पैक्स / लेम्प्स कार्मिकों के अनुसार प्रदेश में लगभग 80 फ़ीसदी ग्राम सेवा सहकारी समितियों की हालत बहुत ज्यादा खराब है । अधिकांश सहकारी समितियां घाटे में चल रही है । कई सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मियों को वेतन भत्ते चुकाने तक का संकट है ।”                      –नंदलाल वैष्णव, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ

फैक्ट फाइल

प्रदेश में कुल ग्राम सेवा सहकारी समितियां – 6503
सक्रिय समितियां – 6450
वर्ष 2018-19 में सहकारी समितियों में चुनाव – 542
आर्थिक तंगी के कारण बंद हुई समितियां – 53

-एक्सपर्ट राय : ग्राम सेवा सहकारी समितियां पहले ही घाटे में चल रही है । इनमें ग्रामीणों का पैसा लगा है । अब उनका लाभांश तो घटेगा ही, उन्हें घाटे का भार भी सहना पड़ेगा ‌। केवल ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर चुनाव खर्च का बोझ डालना उनके लिए कोढ में खाज के समान है ।

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