जालोर 12 अक्टूबर। कृषि विभाग की ओर से सरसों एवं चना फसलों की बुवाई के दौरान डीएपी के स्थान पर अधिक लाभदायक सिंगल फास्फेट उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ.आर.बी.सिंह ने बताया कि जालोर जिले में बारिश की कमी के कारण सरसों एवं चना फसलों की बुवाई अधिक होने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में कृषकों ने सरसों की बुवाई शुरू कर दी है। डीएपी उर्वरक की अत्यधिक मांग के कारण आने वाले समय में इसकी उपलब्धता कम रहने की आशंका बढ गई है। इस कमी की भरपाई के लिए कृषि विभाग द्वारा अन्य कारगर, लाभकारी एवं सुलभ उर्वरकों के संयोजन का उपयोग करने की किसानों को सलाह दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि फसलों में पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए यूरिया व डीएपी उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। यूरिया उर्वरक में 46 प्रतिशत नाईट्रोजन एवं डीएपी उर्वरक में 18 प्रतिशत नाईट्रोजन के साथ ही 46 प्रतिशत फास्फोरस पाया जाता है। देश में डीएपी उर्वरक मुख्यत विदेशों से आयात की जाती है। वर्तमान में अन्तरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में बढोतरी हुई है। इस कारण डीएपी की उत्पादन लागत अधिक होने एवं कीमतें बढने के कारण उर्वरक आयातकों की ओर से इसके आयात में अपेक्षाकृत कम रूचि ली जा रही है। इस कारण इस रबी सीजन में डीएपी उर्वरक की मांग की तुलना में आपूर्ति कम रहने की संभावना है। इस स्थिति में किसानों को फास्फोरस तत्व की पूर्ति के लिए डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग कर सकते है। सिंगल सुपर फास्फेट या एसएसपी को किसान सुपर के नाम से भी जानते है।
जालोर जिले में हर वर्ष डीएपी उर्वरक की खपत लगभग 9 से 10 हजार मैट्रिक टन होती है जबकि अभी तक पोर्टल की सूचना के अनुसार 631 मैट्रिक टन डीएपी जिले में उपलब्ध है। कृषि विभाग ने डीएपी संकट की स्थिति में किसानां को दो विकल्प और उपलब्ध करवाए है। गेहूँ की बुवाई के समय डीएपी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जायेगी। सरसों व चना में किसानों को विकल्प के तौर पर अन्य उर्वरक उपयोग करनी चाहिए। साथ ही राज्य व केन्द्र सरकार डीएपी की सप्लाई के लिए कोशिश कर रही है।
उन्होंने बताया कि सिंगल सुपर फास्फेट एक फास्फोरस युक्त सल्फर प्रदान करने वाला एक मात्र उर्वरक है, जिसमें 16 प्रतिशत फास्फोरस, 11 प्रतिशत सल्फर व 21 प्रतिशत केल्शियम की मात्रा पाई जाती है। यह उर्वरक तिलहनी एवं दलहनी फसलों के लिए सल्फर की उपलब्धता के कारण अन्य उर्वरकों की अपेक्षा अधिक लाभदायक होता है। यह उर्वरक सरसों तिलहनी फसल में दाने की चमक के साथ-साथ तेल की मात्रा एवं चना दलहनी फसल में प्रोटीन की मात्रा को भी बढाता है।
उन्होंने जिले के कृषकों से अनुरोध किया है कि वे डीएपी उर्वरक के 1 बैग के स्थान पर विकल्प के रूप में 3 बैग सिंगल सुपर फास्फेट उर्वरक एवं 1 बैग यूरिया का प्रयोग करे। इस संयोजन से किसान की लागत में भी कमी आयेगी और साथ ही सरसों एवं चना के उत्पादन में वृद्धि होगी।


