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जालोर में पंचायती राज की चुनावी सरगर्मियां तेज: जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर रस्साकशी, अकाल और जवाई नदी का मुद्दा बने सियासी केंद्र

सार

​जालोर जिले की 14 पंचायत समितियों की 433 ग्राम पंचायतों में पंचायती राज चुनाव का बिगुल बज चुका है। 25 नवंबर को होने वाले जिला प्रमुख चुनाव में ऐतिहासिक नेतृत्व की विरासत के बीच अकाल, बकाया फसल बीमा और जवाई नदी जैसे किसान मुद्दे सबसे अहम रहेंगे।

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जालोर| (विशेष संवाददाता)।19 अक्टूबर |जालोर जिले में पंचायती राज (Panchayati Raj) चुनावों का बिगुल बजते ही ग्रामीण राजनीति का पारा चढ़ गया है। जिले की 14 पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली 433 ग्राम पंचायतों में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। 13 अक्टूबर (October) को जिला परिषद सदस्यों के नामांकन की लोक सूचना जारी होने के बाद 16 अक्टूबर (October) तक दावेदारों ने अपने पर्चे दाखिल किए। इसके बाद 17 अक्टूबर (October) को संवीक्षा तथा 19 अक्टूबर (October) को नाम वापसी व चुनाव चिह्नों के आवंटन के साथ ही चुनावी मुकाबला अब पूरी तरह से साफ हो गया है। इस पूरी चुनावी कवायद का मुख्य केंद्र जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव है। जिला प्रमुख का चुनाव 25 नवंबर (November) तथा प्रधान का चुनाव 27 नवंबर (November) 2026 को तय किया गया है, जिसको लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है।

जालोर जिले में पंचायती राज व्यवस्था के तहत जिला प्रमुख की कुर्सी का अपना एक विशिष्ट ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक महत्व रहा है। वर्ष 1959 में पंचायती राज (Panchayati Raj) की स्थापना के बाद से अब तक कई दिग्गज नेताओं ने जालोर जिला परिषद के नेतृत्व की कमान संभाली है। सरकारी अभिलेखों अनुसार, जिला परिषद जालोर के प्रथम जिला प्रमुख श्री मालम सिंह (1959 व 1961) रहे। इसके पश्चात श्री देवी सिंह (1965-1973), श्री मिश्रीमल (कार्यवाहक 1977 तक), श्री मंगल सिंह (1981), श्री बन्नेसिंह व श्री गणपत सिंह (कार्यवाहक 1985), श्री ठाकराराम चौधरी (1995), श्री उकसिंह देवल (2000-2003), श्री नारायणसिंह देवल (2003 उपचुनाव ), श्री नगराज पुरोहित (कार्यवाहक ), श्रीमती मंजू देवी (2005) तथा श्रीमती जसवंत कंवर ( 2010 ) ने जिला परिषद का नेतृत्व किया है। वहीं वर्ष 2015 में डॉ. वन्नेसिंह गोहिल और वर्ष 2020 में राजेश कुमार राणा ने जिला प्रमुख का पद संभालकर जिले के विकास को दिशा दी।

इस बार का चुनाव केवल स्थानीय विकास तक सीमित न रहकर राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों की कसौटी पर भी कसा जा रहा है। टिकट वितरण में दोनों प्रमुख दलों से विभिन्न जातियों व सामाजिक वर्गों को साधने की अपेक्षाएं की जा रही हैं। इसके साथ ही वर्तमान में जिले का बड़ा भूभाग अकाल (Drought) की चपेट में है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। पिछले समय में फसल बीमा (Crop Insurance), कृषि आदान अनुदान की बकाया राशि और जवाई नदी के जल पुनर्भरण जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर किसान संगठनों ने जिलेभर में बड़े स्तर पर आंदोलन किए हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से जालोर की कृषि और जल जीवन रेखा मानी जाने वाली जवाई नदी का मुद्दा आज भी जस का तस बना हुआ है। ऐसे में अकाल की मार झेल रहे किसानों का असंतोष, जातीय निष्ठाएं और चुनावी वादे मिलकर यह तय करेंगे कि इस बार 25 नवंबर (November) को जालोर जिला परिषद के सिर पर किसका ताज सजेगा।

 14 पंचायत समितियों की 433 ग्राम पंचायतों में चुनावी बिसात

जालोर जिले के पुनर्गठित एवं विस्तारित प्रशासनिक स्वरूप के तहत इस बार 14 पंचायत समितियों की कुल 433 ग्राम पंचायतों में मतदान की प्रक्रिया संपन्न हो रही है। जिले की भौगोलिक संरचना और पंचायत समिति वार ग्राम पंचायतों का वितरण चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहा है।प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, भीनमाल पंचायत समिति में 37, जसवंतपुरा में 35, सायला में 38, आहोर में 25, भाद्राजून में 24, जालोर में 40 तथा उम्मेदाबाद में 21 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। वहीं सांचौर क्षेत्र के अंतर्गत सांचौर में 28, चितलवाना में 26, भादरूणा में 25 एवं सरवाना में 32 ग्राम पंचायतों का क्षेत्र आता है। इसके अलावा रानीवाड़ा क्षेत्र के अंतर्गत रानीवाड़ा में 49, बागोड़ा में 34 एवं सरनाऊ में 19 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।इतने विशाल क्षेत्र और ग्राम पंचायतों के जाल के कारण प्रत्याशियों के लिए घर-घर संपर्क साधना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रत्येक पंचायत समिति क्षेत्र में स्थानीय मुद्दे भिन्न हैं, जिससे जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में मुकाबला काफी रोचक हो गया है। ग्रामीण अंचल में चौपालों पर चुनावी चर्चाएं गर्म हैं और प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।

 अकाल की मार और जवाई नदी का मुद्दा: किसानों का रुख रहेगा निर्णायक

जालोर। इस बार के पंचायती राज (Panchayati Raj) चुनाव में अकाल (Drought) की गंभीर स्थिति और कृषि संबंधी समस्याएं सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभरी हैं। जिले का अधिकांश भूभाग इस वर्ष अकाल की चपेट में है, जिससे फसलें नष्ट हो चुकी हैं और पशुधन के सामने चारे-पानी का संकट गहरा गया है।कृषि आदान अनुदान की बकाया राशि और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) के क्लेम के भुगतान को लेकर जिलेभर में किसान संगठनात्मक रूप से लंबे समय से आंदोलनरत रहे हैं। किसानों का आरोप है कि आपदा और सूखे के बावजूद उन्हें समय पर राहत राशि नहीं मिल पाई है। इसके साथ ही जालोर जिले का ऐतिहासिक एवं वर्तमान परिदृश्य हमेशा से जवाई नदी और इसके पानी के अधिकार से जुड़ा रहा है। जवाई नदी के अधिशेष पानी को जालोर तक पहुंचाने और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग वर्षों से उठ रही है।आंदोलनरत किसान संगठनों का स्पष्ट कहना है कि जो भी प्रत्याशी या दल किसानों के इन मुख्य मुद्दों पर पारदर्शी नीति और तुरंत राहत का आश्वासन देगा, ग्रामीण जनता उसी का समर्थन करेगी। ऐसे में जिला प्रमुख पद के उम्मीदवारों के लिए किसानों का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती होगा।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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